Ghaziabad। गाजियाबाद में 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के एक सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में शिकायतकर्ता अर्पित गुप्ता ने पुलिस को सूचना दी थी कि एक अज्ञात नंबर से कॉल कर खुद को कुख्यात गैंग से जुड़ा बताकर उनसे भारी रकम की मांग की जा रही है।
धमकी भरे कॉल से शुरू हुआ मामला
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने अर्पित गुप्ता से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी और रकम न देने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की गई।
स्वाट और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई
स्वाट टीम और अपराध शाखा की संयुक्त जांच में मामला सही पाया गया। इसके बाद 14 अप्रैल 2026 को Indirapuram Police Station में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने वेब सिटी क्षेत्र से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक महिला भी शामिल है। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल वारदात में किया गया था।
प्रॉपर्टी डीलरों की निकली साजिश
पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी रविन्द्र उर्फ रोबिन ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह खुद प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त का काम करता है और पिछले तीन वर्षों से अर्पित गुप्ता को जानता था।
दोनों के बीच पहले व्यावसायिक संबंध भी रह चुके थे, जिससे आरोपियों को पीड़ित की आर्थिक स्थिति की पूरी जानकारी थी।
महिला आरोपी की भूमिका अहम
मुख्य आरोपी ने बताया कि उसकी मित्र सविता उर्फ सवी चौधरी, जो प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़ी थी, को उसने करीब छह महीने पहले अर्पित गुप्ता के ऑफिस में नौकरी दिलवाई थी।
करीब 10 दिन पहले नौकरी से निकाले जाने के बाद सविता ने बदला लेने और पैसे वसूलने की योजना बनाई। इसी के बाद पूरी साजिश रची गई।
ऐसे रची गई रंगदारी की प्लानिंग
आरोपियों ने साजिश को अंजाम देने के लिए तीसरे आरोपी तुषार बैसौया को भी शामिल किया। योजना के तहत:
- किसी अन्य व्यक्ति की आईडी पर सिम कार्ड लिया गया
- सेकेंड हैंड मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया
- व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए संपर्क किया गया
- बार-बार लोकेशन बदलकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई
10 अप्रैल को पहली कॉल की गई, जबकि 11 और 13 अप्रैल को दोबारा धमकी देकर दबाव बनाया गया।
पुलिस ने ऐसे किया खुलासा
पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच के चलते आरोपी ज्यादा समय तक बच नहीं सके। रविन्द्र को पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किया गया, जबकि सविता चौधरी और तुषार बैसौया को उनके घरों से पकड़ा गया।
गैंग कनेक्शन की भी जांच जारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिस कुख्यात गैंग का नाम लेकर धमकी दी गई थी, उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। साथ ही मोबाइल फोन उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की संलिप्तता भी जांच के दायरे में है।









