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BPC न्यूज़ ब्यूरो -:चार साल पहले पास हुआ CAA बिल देश भर में हुआ था विरोध अब करेगी सरकार लागू।

BPC News National Desk
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BPC न्यूज़ ब्यूरो (CAA LAW)

BPC न्यूज़ ब्यूरो -:चार साल पहले पास हुआ CAA बिल देश भर में हुआ था विरोध अब करेगी सरकार लागू।

नई दिल्‍ली : 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) को अधिसूचित करने जा रही है.

 

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BPC न्यूज़ ब्यूरो -:चार साल पहले पास हुआ CAA बिल देश भर में हुआ था विरोध अब करेगी सरकार लागू।नई दिल्‍ली : 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) को अधिसूचित करने जा रही है. मनी कंट्रोल वेबसाइट ने सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा कि केंद्र सरकार ने इसके लिए पूरा मन बना लिया है. साल 2019 में जैसे ही संसद में पास हुआ था। बिल उसके बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) कानून के तहत पड़ोसी देश पाकिस्‍तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से सताए गए,ऐसे गैर-मुस्लिम प्रवासियों जैसे हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाइयों को भारतीय राष्ट्रीयता दी जाएगी, जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए थे.एक पदाधिकारी ने कहा की सरकार जल्द ही (CAA) के लिए नियम जारी करने जा रही है. एक बार नियम जारी होने के बाद कानून लागू किया जा सकता है, और योग्‍य लोगों को भारतीय नागरिकता भी दी जा सकती है. पदाधिकारी ने कहा की अगले लोकसभा चुनावों की घोषणा से पहले नियमों को लागू किया जाएगा. ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार है.पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी,आवेदकों को वह वर्ष बताना होगा जब उन्होंने यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश किया था. आवेदकों से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा.संसदीय प्रक्रियाओं की नियमावली के अनुसार किसी भी कानून के नियम राष्ट्रपति की सहमति के छह महीने के भीतर तैयार किए जाने चाहिए या लोकसभा और राज्यसभा में अधीनस्थ विधान समितियों से विस्तार की मांग की जानी चाहिए. 2020 से गृह मंत्रालय नियम बनाने के लिए संसदीय समितियों से नियमित अंतराल पर एक्सटेंशन लेता रहा है. वही संसद में कानून पारित किए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के दौरान सौ से ज्यादा लोगों की जान चली गई.27 दिसंबर को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सीएए के कार्यान्वयन को कोई नहीं रोक सकता क्योंकि यह देश का कानून है. उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया था. कोलकाता में पार्टी की एक बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सीएए को लागू करना बीजेपी की प्रतिबद्धता है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सीएए का विरोध कर रही है.

मनी कंट्रोल वेबसाइट ने सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा कि केंद्र सरकार ने इसके लिए पूरा मन बना लिया है. साल 2019 में जैसे ही संसद में पास हुआ था।

 

बिल उसके बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) कानून के तहत पड़ोसी देश पाकिस्‍तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से सताए गए,

 

ऐसे गैर-मुस्लिम प्रवासियों जैसे हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाइयों को भारतीय राष्ट्रीयता दी जाएगी, जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए थे.

एक पदाधिकारी ने कहा की सरकार जल्द ही (CAA) के लिए नियम जारी करने जा रही है. एक बार नियम जारी होने के बाद कानून लागू किया जा सकता है, और योग्‍य लोगों को भारतीय नागरिकता भी दी जा सकती है.

 

पदाधिकारी ने कहा की अगले लोकसभा चुनावों की घोषणा से पहले नियमों को लागू किया जाएगा. ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार है.

 

पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी,आवेदकों को वह वर्ष बताना होगा जब उन्होंने यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश किया था. आवेदकों से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा.

 

संसदीय प्रक्रियाओं की नियमावली के अनुसार किसी भी कानून के नियम राष्ट्रपति की सहमति के छह महीने के भीतर तैयार किए जाने चाहिए या लोकसभा और राज्यसभा में अधीनस्थ विधान समितियों से विस्तार की मांग की जानी चाहिए.

 

2020 से गृह मंत्रालय नियम बनाने के लिए संसदीय समितियों से नियमित अंतराल पर एक्सटेंशन लेता रहा है. वही संसद में कानून पारित किए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के दौरान सौ से ज्यादा लोगों की जान चली गई.

 

27 दिसंबर को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सीएए के कार्यान्वयन को कोई नहीं रोक सकता क्योंकि यह देश का कानून है. उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया था.

 

कोलकाता में पार्टी की एक बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सीएए को लागू करना बीजेपी की प्रतिबद्धता है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सीएए का विरोध कर रही है.

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