BPC न्यूज़ ब्यूरो – मदर्स डे पर इंडिया विजन फाउंडेशन और जिला कारागार डासना गाजियाबाद की एक अनोखी पहल।

कहते है, कि किसी भी महिला के लिए उनके बच्चे ही सबकुछ होते हैं, और ऐसे में अगर दोनो को दूर कर दिया जाए तो दोनो के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता हैं। जिससे उनके दैनिक जीवन और विकास में रुकावट आ जाती हैं।
मदर्स डे के उपलक्ष में दोनो संस्थाओं ने मिलकर जेल में बंद महिला बंदियों को उनके बच्चो से खुली मुलाकात करवा कर एक स्नेह और इंसानियत का परिचय दिया। बतादे कि महिला जब जेल में आ जाए तो सिर्फ उनके साथ 6 साल तक के बच्चे ही जेल के अंदर माओ के साथ रह सकते हैं,

पर बहुत सी ऐसी भी महिलाएं थी जिनके बच्चे उनसे दूर कही रिश्तेदारों या फिर अकेले रह रहे थे, और कई बच्चे तो ऐसे भी थे जो कभी अपनी माओ से मिले ही नही। जिससे उन माओ के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत ही गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा था।
इसके लिए उन माओ के बच्चों से संपर्क किया गया और इस मौके पर दोनो को एक बहुत ही सुंदर उपहार दिया गया। इंडिया विज़न फाउंडेशन निरंतर जेल में बंद बंदियों के सुधार और कल्याण के लिए कार्य कर रही हैं,

इसी के अंतर्गत उनका ये मदर चाइल्ड मिट का कार्यक्रम भी हैं, जिससे बच्चे और मां के रिश्ते को मजबूत बनाकर उनके मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की कोशिश की जाती हैं। इस कार्यक्रम में 36 बच्चो को उनकी 16 माओ से मिलाया गया। सभी बच्चो ने गुलाब का फूल और चॉकलेट देकर अपनी मां को गले लगाया, सभी माओ ने भी अपने आंसू भरी आंखों के साथ अपने बच्चो को गले लगा कर ढेर सारा प्यार दिया,

ये काफी भावुकता भरा माहौल रहा। जेल अधीक्षक श्री आलोक सिंह और संस्था के टीम द्वारा बच्चो को डॉक्टर किरण बेदी के जीवनी पर आधारित उनकी कॉमिक बुक के साथ बच्चो को ढेर सारी खाने पीने का सामान भी वितरण किया गया। इन सबके लिए सभी मिला बंदियों ने जिला कारागार गाजियाबाद और इण्डिया विजन फाऊंडेशन को दिल से धन्यवाद किया।

दोनो संस्थाओं ने भी इसी तरह से आगे भी बच्चो को उनकी माओ से मिलाते रहने का आश्वासन भी दिया जिससे उन बच्चो और माओ के चहरे पे एक अच्छी सी खुशी देखने को भी मिला।










