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उत्तराखंड: फर्जी दस्तावेजों से बन रहे स्थायी निवास प्रमाणपत्र, दस्तावेज लेखक रंगे हाथों गिरफ्तार

BPC News National Desk
4 Min Read

हल्द्वानी, 14 नवंबर 2025: उत्तराखंड में स्थायी निवास प्रमाणपत्र (डomicile Certificate) प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने गुरुवार देर शाम हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर अचानक छापा मारकर दस्तावेज लेखक फैजान मिकरानी को फर्जी प्रमाणपत्र बनाते रंगे हाथों पकड़ लिया। इस कार्रवाई ने राज्य में चल रहे इस अवैध धंधे की काली सच्चाई को उजागर कर दिया है।

जनता दरबार में मिली शिकायत, शुरू हुई गोपनीय जांच

मामला उस समय गर्माया जब जनता दरबार में एक स्थानीय निवासी ने कमिश्नर दीपक रावत के सामने शिकायत की कि उसके नाम और पते पर बरेली (उत्तर प्रदेश) निवासी एक व्यक्ति का उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रमाणपत्र बना दिया गया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे यह जानकारी तब हुई जब संबंधित व्यक्ति ने उसी के आधार पर सरकारी योजना का लाभ उठाने की कोशिश की।
कमिश्नर रावत ने तुरंत इसकी गंभीरता को समझा और गोपनीय जांच के आदेश दिए। जांच में पता चला कि बनभूलपुरा के एक CSC सेंटर से फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड, बिजली बिल और जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर गैर-उत्तराखंडी लोगों को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे थे।

छापे में खुलासा: फर्जी दस्तावेजों का जखीरा बरामद

गुरुवार रात करीब 9:30 बजे कमिश्नर दीपक रावत खुद अपनी टीम के साथ बनभूलपुरा पहुंचे और CSC सेंटर पर दबिश दी। वहां मौजूद फैजान मिकरानी को एक आवेदन पर फर्जी दस्तावेज अपलोड करते पकड़ा गया।

बरामद सामग्री में शामिल हैं:

  1. 15 से अधिक फर्जी आधार कार्ड (उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल के निवासियों के)
  2. फोटोशॉप से बदले गए बिजली बिल और राशन कार्ड
  3. उत्तराखंड के ग्राम प्रधानों के फर्जी हस्ताक्षर वाली संस्तुतियाँ
  4. 8 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
  5. लैपटॉप और प्रिंटर जिसमें फर्जी टेम्प्लेट्स भरे थे

कैसे चल रहा था रैकेट?

जांच में सामने आया कि यह गिरोह CSC सेंटर के जरिए ऑनलाइन पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड करता था। एक प्रमाणपत्र के बदले 5,000 से 15,000 रुपये तक वसूले जाते थे। गैर-राज्य के लोग नौकरी, सरकारी योजनाओं (जैसे मुख्यमंत्री आवास योजना, छात्रवृत्ति) और जमीन खरीदने के लिए ये प्रमाणपत्र बनवा रहे थे।

कमिश्नर रावत ने बताया, “यह सिर्फ एक केंद्र नहीं, पूरे नेटवर्क का हिस्सा है। कुछ तहसील कर्मचारी और CSC ऑपरेटर भी शामिल हैं। हम पूरे सिस्टम की ऑडिट कराएंगे।”

आरोपी की गिरफ्तारी, आगे की कार्रवाई

फैजान मिकरानी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 IPC और IT एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पूछताछ में उसने कई अन्य CSC ऑपरेटर्स और दलालों के नाम उगले हैं।

उत्तराखंड की पहचान पर खतरा

स्थायी निवास प्रमाणपत्र उत्तराखंड में जमीन खरीद, नौकरी और सरकारी लाभ के लिए जरूरी है। फर्जी प्रमाणपत्रों से न सिर्फ राज्य की जनसांख्यिकी प्रभावित हो रही है, बल्कि स्थानीय युवाओं के अधिकार भी छीने जा रहे हैं।

जनता में गुस्सा, मांग: सख्त कार्रवाई

स्थानीय लोग कमिश्नर की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं। एक युवा ने कहा, “हमारे हक छीने जा रहे थे। अब सिस्टम साफ होना चाहिए।”
कमिश्नर दीपक रावत ने कहा, “उत्तराखंड हमारी मातृभूमि है। इसे बाहरियों के हाथों खेलने नहीं देंगे। यह शुरुआत है, पूरा नेटवर्क जल्द बेनकाब होगा।”
आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां और CSC सेंटर्स पर छापे की संभावना है।

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