लेखक: आनन्द प्रकाश
महान अभिनेता धर्मेन्द्र जी के प्रति यह श्रद्धांजलि केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि उनके साथ बिताए गए अनमोल पलों का जीवंत दस्तावेज है। लेखक आनन्द प्रकाश ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे धर्मेन्द्र जी से अनेक बार मिले और हर बार उनका स्नेह, मुस्कान और अपनापन दिल को छू जाता था।
धर्मेन्द्र जी का स्वभाव हमेशा हंसमुख और जीवंत रहा। वे शायरी और कविताओं के माध्यम से हर वातावरण को प्रसन्नता से भर देते थे। रामानुज स्टूडियो, हैदराबाद में फिल्म “यमला पगला दीवाना” की शूटिंग के दौरान लेखक को पोस्टमैन का छोटा लेकिन यादगार रोल मिला, जिसे वे जीवन का अमूल्य उपहार मानते हैं।
आनन्द प्रकाश के अनुसार, लोनावला स्थित धर्मेन्द्र जी के फार्म हाउस पर कई बार पंजाबी भोजन का आनंद लेने का सौभाग्य भी मिला। वे बताते हैं कि बॉम्बे जाना धर्मेन्द्र जी के दर्शन किए बिना अधूरा लगता था।

कोरोना काल के दौरान भी जब लेखक अचानक मुंबई पहुंचे, तुरंत मिलने की अनुमति दी और मास्क लगाए हुए लेखक को बिना झिझक गले लगा लिया — यह उनका मानवीय स्नेह दर्शाता है।
एक दिलचस्प प्रसंग में लेखक बताते हैं कि जब उन्होंने कपिल शर्मा से मिलवाने का आग्रह किया, हंसते हुए तुरंत फोन मिलाया। संयोग से कपिल शर्मा दिल्ली से मुंबई पहुंचे ही थे और वे अपनी पत्नी के साथ एयरपोर्ट से सीधे के घर आए।
इन सभी स्मृतियों के माध्यम से लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि वास्तव में “यारों के यार” थे — स्नेही, मददगार और सच्चे इंसान।
ऐसे महान व्यक्तित्व के लिए हृदय से श्रद्धांजलि।










