रामायण मेला समिति, अयोध्या द्वारा 44वें रामायण मेले का भव्य शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के माहौल में किया गया। महंत मिथिलेश नंदनी शरण जी ने संत तुलसीदास जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता रसिक पीठाधीश्वर जनमेजय शरण जी महाराज ने की।
इस अवसर पर तुलसी दल पत्रिका का विमोचन भी किया गया, वहीं हरे रामदास जी की मंडली द्वारा प्रस्तुत रामलीला ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
सांस्कृतिक व धार्मिक चेतना का संगम
संयोजक आशीष मिश्रा ने बताया कि रामायण मेला बीते 43 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा है और इस वर्ष इसका 44वां संस्करण है, जिसमें रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। यह मेला भगवान श्रीराम की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।
अयोध्या रामायण मेला संतों का संदेश
महंत मिथिलेश नंदनी शरण जी ने कहा,
“रामायण मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि जीवन मार्गदर्शन का स्रोत है। यह हमें मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन की प्रेरणा देता है।”
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में पूर्व सांसद डॉ निर्मल खत्री, महंत अवधेश दास जी महाराज, नागा राम लखन दास, नंद कुमार मिश्रा, एसएन सिंह, प्रभात शर्मा, डॉ जनार्दन उपाध्याय, रामशरण दास रामायणी, चीफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स डॉ. शिखा दरबारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अयोध्या की धार्मिक पहचान का उत्सव
रामायण मेला अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। यह आयोजन न केवल श्रद्धालुओं को आस्था से जोड़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराता है।










