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प्रशासनिक भवनों के नाम बदलकर ‘सेवा’ और ‘कर्तव्य’ को किया केंद्र ने

BPC News National Desk
3 Min Read

केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख प्रशासनिक भवनों के नामों में बड़ा बदलाव करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) परिसर का नाम अब आधिकारिक रूप से “सेवा तीर्थ”, देश के सभी राजभवनों का नाम “लोकभवन” तथा दिल्ली स्थित केंद्रीय सचिवालय का नाम “कर्तव्य भवन” कर दिया है।

यह निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अनुमोदित किया गया और इसके बाद कैबिनेट सचिव ने आधिकारिक घोषणा की। आदेश के अनुसार नए नाम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।

सरकार का उद्देश्य: औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाकर भारतीय मूल्यों को बढ़ावा

केंद्र सरकार ने कहा कि ये नाम परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस पहल का हिस्सा हैं जिसमें प्रशासनिक ढांचे को भारतीयता, जनसेवा और कर्तव्यनिष्ठा की भावना के अनुरूप ढाला जा रहा है।

नए नामों का अर्थ:

  • सेवा तीर्थ: PMO को जनता की सेवा के केंद्रबिंदु और पवित्र दायित्व का प्रतीक बनाने का प्रयास।

  • लोकभवन: राज्यपाल भवनों को जनता के भवन के रूप में पुनर्परिभाषित करने की अवधारणा।

  • कर्तव्य भवन: केंद्रीय सचिवालय परिसर में कार्यरत अधिकारियों को कर्तव्यबोध और जवाबदेही की याद दिलाने का उद्देश्य।

नाम परिवर्तन—संक्षिप्त सूची

पुराना नाम नया नाम
प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर सेवा तीर्थ
सभी राज्यों के राजभवन लोकभवन
केंद्रीय सचिवालय (उत्तरी व दक्षिणी खंड) कर्तव्य भवन

तत्काल प्रभाव से लागू—सभी प्लेटें, दस्तावेज़ बदलेंगे

निर्णय के अनुसार:

  • सभी आधिकारिक पत्राचार

  • साइनबोर्ड

  • सरकारी वेबसाइटें

  • दस्तावेज़

  • इमारतों के प्रवेश बोर्ड

नई नामावली के साथ अपडेट किए जाएंगे।

ऐतिहासिक नाम परिवर्तनों की कड़ी

सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कदम “विरासत की पुनर्स्थापना” के सिद्धांत पर आधारित है। इससे पहले भी कई प्रमुख स्थानों के नाम बदले गए:

  • इलाहाबाद → प्रयागराज

  • फैजाबाद → अयोध्या

  • मुगलसराय → दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन

  • रेसकोर्स रोड → लोक कल्याण मार्ग

इन परिवर्तनों की कड़ी में यह नया निर्णय अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली

विपक्ष ने सरकार पर “नाम बदलने की राजनीति” करने का आरोप लगाया है, जबकि सत्ताधारी दल ने इसे ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने का प्रयास बताया।
नेताओं का कहना है:

“नाम सिर्फ शब्द नहीं होते, वे देश की दिशा और विचारधारा को दर्शाते हैं।”

जनता की प्रतिक्रिया और आगामी अभियान

जनता के बीच भी इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सरकार जल्द ही जागरूकता अभियान चलाकर नए नामों को व्यापक रूप से प्रचारित करेगी।

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