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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का सेक्शन-1 खुला

BPC News National Desk
4 Min Read

देश के सबसे बड़े हाई-स्पीड कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स में से एक दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का पहला सेक्शन (अक्षरधाम से बागपत बाईपास, 32 किमी) एक महीने के ट्रायल के लिए आज से आम वाहनों के लिए खोल दिया गया।
NHAI के अधिकारियों के अनुसार, इस सेक्शन पर वाहनों की अधिकतम रफ्तार 120 किमी/घंटा होगी। पूरे कॉरिडोर के शुरू होने के बाद दिल्ली से देहरादून की दूरी 2.5 घंटे में पूरी की जा सकेगी — जो वर्तमान समय (6–7 घंटे) से लगभग आधा है।

ट्रायल के पहले दिन हजारों वाहन इस नए एक्सप्रेसवे पर उमड़े। सोशल मीडिया पर ड्रोन फुटेज और कारों के हाई-स्पीड क्लिप वायरल हो रहे हैं।

लेकिन बड़ा सवाल — क्या देहरादून इतनी तेज़ी को संभाल पाएगा?

जहाँ दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के लिए विकास, पर्यटन और निवेश के नए द्वार खोलेगा, वहीं देहरादून शहर की मौजूदा ट्रैफिक क्षमता इस नए भार को सहने की स्थिति में नहीं दिखती।

देहरादून में ट्रैफिक की वर्तमान स्थिति — चिंताजनक

शहर के प्रमुख मार्ग पहले ही अपनी क्षमता से 100% से अधिक सैचुरेटेड हैं।

प्रमुख समस्याएँ:

  • मसूरी रोड, हरिद्वार रोड, ISBT, रेलवे स्टेशन, क्लॉक टावर — दिन में 10–12 घंटे जाम

  • शहर में मात्र 18,000 वैध पार्किंग स्लॉट, जबकि वाहन 6 लाख+

  • पिछले 5 वर्षों में वाहनों की संख्या में 45% वृद्धि

  • नई सड़कों और बाईपास पर प्रगति लगभग न के बराबर

  • रिंग रोड और वेस्टर्न बाईपास अभी भी कागजों में

ट्रैफिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर देहरादून शहर तैयार नहीं हुआ, तो एक्सप्रेसवे का लाभ शहर के अंदर की जाम से खत्म हो जाएगा।

विशेषज्ञों की चिंता

वरिष्ठ पत्रकार और यातायात विशेषज्ञ अनिल सैनी कहते हैं:

“एक्सप्रेसवे बाहर से गाड़ियाँ तेजी से लाएगा, लेकिन शहर के भीतर वे कहाँ जाएंगी?
यदि देहरादून में 10–15 किमी जाम में फँसना पड़े, तो एक्सप्रेसवे का 2.5 घंटे का फायदा खत्म हो जाएगा।”

प्रशासन की योजनाएँ — लेकिन अभी भी कागजों पर

जिलाधिकारी देहरादून सोनिका का कहना है:

  • ISBT के पास मल्टी-लेवल पार्किंग जल्द शुरू

  • स्मार्ट सिग्नल सिस्टम की टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में

  • मसूरी रोड और हरिद्वार रोड पर नए फ्लाईओवर की DPR तैयार

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश प्रोजेक्टों का काम अभी शुरू होना बाकी है

अगर अभी से तैयारी नहीं हुई तो?

एक्सप्रेसवे तो देहरादून तक लेकर आएगा — लेकिन शहर के भीतर की सड़कों पर बोझ आने वाला है।

तुरंत जरूरी कदम:

  • रिंग रोड और बाईपास का कार्य शुरू

  • शहर-दरवाजे (एंट्री पॉइंट्स) पर बड़े इंटीग्रेटेड पार्किंग प्लाजा

  • सिटी बसें, ई-रिक्शा, मिनी-रूट्स बढ़ाकर लोकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट को 10X मजबूत

  • पर्यटन यातायात (मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार जाने वाले) के लिए डेडिकेटेड रूट

वरना लोग जल्द ही कहेंगे—

“दिल्ली से देहरादून 2.5 घंटे में आ गए, लेकिन शहर में घुसते ही 2.5 घंटे जाम में फँस गए!”

निष्कर्ष

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के लिए वरदान है। पर सवाल केवल “कितनी जल्दी पहुँचे?” का नहीं, बल्कि “शहर पहुँचने के बाद क्या होगा?” का है।

फिलहाल देहरादून तैयार नहीं है। पर अभी भी समय है — बशर्ते तैयारी समय पर शुरू हो जाए।

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