उत्तराखंड पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ड्रग्स फ्री कैंपस” अभियान को नई सफलता मिली है। अभियान के तहत मंगलवार को क्लेमेंटाउन क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में पुलिस, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कक्षा 9 से 12 तक के 145 छात्रों का रैंडम ड्रग टेस्ट किया गया, जिनमें से सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई।

निरीक्षण से पहले प्रत्येक छात्र और अभिभावक से लिखित सहमति (कन्सेंट फॉर्म) प्राप्त किया गया। इसके बाद मौके पर ही यूरिन सैंपल लेकर रैपिड ड्रग टेस्ट किट की सहायता से जांच की गई।
टीम ने बच्चों को नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से समझाया और जरूरतमंद छात्रों को काउंसलिंग भी दी।
अब तक 572 छात्रों का टेस्ट, अधिकतर रिपोर्ट्स नेगेटिव
अभियान की शुरुआत से अब तक देहरादून और अन्य जिलों के स्कूलों में कुल 572 छात्र-छात्राओं का ड्रग टेस्ट किया जा चुका है।
अधिकांश रिपोर्टें नेगेटिव आई हैं, जो इंगित करती हैं कि शैक्षणिक परिसरों में नशे का प्रसार अभी सीमित है, लेकिन सतर्कता और निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है।

अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन ने की पहल की सराहना
क्लेमेंटाउन के स्कूल में निरीक्षण के दौरान अभिभावक, शिक्षक और प्रबंधन प्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने पुलिस की इस मुहिम का स्वागत किया।
एक अभिभावक ने कहा—
“यह अभियान हमारे बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। पहले हमें पता भी नहीं चलता था कि स्कूलों में क्या चल रहा है। अब हमें भरोसा है कि संस्थान में नशे जैसी कोई गतिविधि नहीं है।”
पुलिस का उद्देश्य—जागरूकता + रोकथाम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार “ड्रग्स फ्री कैंपस” सिर्फ टेस्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य:
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छात्रों को नशे से बचाना
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अभिभावकों में जागरूकता बढ़ाना
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स्कूल परिसरों को सुरक्षित बनाना
है।
पुलिस ने बताया कि आने वाले समय में देहरादून ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी इस तरह के औचक निरीक्षण किए जाएंगे।
निष्कर्ष
उत्तराखंड पुलिस का यह अभियान युवाओं के बीच नशे के खिलाफ एक निर्णायक कदम साबित हो रहा है। क्लेमेंटाउन स्कूल के सभी छात्रों की रिपोर्ट नेगेटिव आना एक सकारात्मक संकेत है, जो बताता है कि सामूहिक प्रयास से नशे पर काबू पाया जा सकता है।









