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मेरठ आधी रात निकाह मामला: ग्रामीणों ने पकड़े गए प्रेमी-प्रेमिका का कराया निकाह, 50 हजार देकर विदा किया दामाद

BPC News National Desk
3 Min Read

मेरठ आधी रात निकाह मामला उस समय चर्चा का विषय बन गया जब परीक्षितगढ़ क्षेत्र के गांव इकला रसूलपुर में ग्रामीणों ने प्रेमी-प्रेमिका को रंगे हाथ पकड़ा और आधी रात में ही निकाह करा दिया। यह अनोखी घटना पूरे इलाके में तेजी से फैल गई।

रंगे हाथ पकड़े गए प्रेमी-प्रेमिका, तीन साल से था प्रेम-संबंध

युवक अलफाज (निवासी—मवाना, मोहल्ला गाढ़ा चौक) बुधवार देर रात अपने दो दोस्तों के साथ प्रेमिका मुंतहा परवीन से मिलने गांव पहुंचा।
दोनों पिछले तीन साल से प्रेम-संबंध में थे। युवती के परिवार वाले उसकी माता के इलाज के लिए शहर गए थे, जिससे वह घर में अकेली थी।

जैसे ही अलफाज घर में दाखिल हुआ, ग्रामीणों ने उसे देख लिया और तुरंत पकड़ लिया। उसके दोनों साथी मौके से भाग निकले। पूछताछ में युवक ने साफ कहा कि वह अपनी प्रेमिका से मिलने आया था और दोनों शादी करना चाहते थे।

परिवारों को बुलाया गया, ग्रामीण बोले—रिश्ता मंज़ूर करो

ग्रामीणों ने तुरंत दोनों परिवारों को बुलाया। गाँव वालों ने कहा कि चूंकि दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं, इसलिए नाज़ुक स्थिति को देखते हुए रिश्ते को मंज़ूरी दे देनी चाहिए।

लड़के पक्ष ने कुछ मोहलत मांगी, लेकिन लड़की पक्ष ने इनकार कर दिया।
अंततः ग्रामीणों और बुजुर्गों की मौजूदगी में दोनों परिवार सहमति पर पहुँचे।

आधी रात में काजी बुलवाकर निकाह, 11 गवाह और 50 हजार की विदाई

गाँव में ही रातों-रात:

  • काजी को बुलाया गया

  • दुल्हन तैयार कराई गई

  • मेंहदी लगाई गई

  • शादी का जोड़ा मँगवाया गया

11 गवाहों के हस्ताक्षर से एक लिखित राजीनामा भी तैयार किया गया।

निकाह के बाद लड़की के पिता ने दामाद अलफाज को 50,000 रुपये देकर अपनी बेटी विदा की।
मवाना पहुँचने पर नए जोड़े का ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया।

ग्राम प्रधान बोले—दोनों परिवारों की सहमति से हुआ निकाह

ग्राम प्रधानपति शरीफ ने बताया:

“निकाह दोनों पक्षों की सहमति से कराया गया। मामला बिगड़ने पर पुलिस तक जाने की आशंका थी, इसलिए ग्रामीणों ने परंपरा के अनुसार निर्णय लिया।”

निष्कर्ष

मेरठ आधी रात निकाह मामला प्रेम संबंधों पर ग्रामीण समाज की पारंपरिक प्रतिक्रिया और सामाजिक दबाव दोनों को दर्शाता है। बहस का विषय यह भी है कि ऐसे मामलों में औपचारिक सहमति कितनी स्वैच्छिक होती है। फिर भी, गांव व परिवारों ने तनाव बढ़ने से पहले समाधान निकाल लिया।

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