रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कल देर रात विशेष विमान से नई दिल्ली पहुंचे। यह उनकी दो दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा का हिस्सा है।
आज सुबह हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता और फिर भारत–रूस बिजनेस फोरम को संबोधित किया।
यह उच्चस्तरीय मुलाकात पुतिन मोदी बैठक 2025 को रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

व्यापार और पर्यटन पर बड़ा फोकस—मोदी ने की नई घोषणाएँ
प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन के साथ आए बड़े बिजनेस डेलीगेशन को विशेष रूप से सराहा। उन्होंने कहा:
“इतना बड़ा डेलीगेशन लेकर आना राष्ट्रपति पुतिन की बड़ी पहल है। मैं आप सभी को धन्यवाद देता हूं।”
भारतीय पर्यटन उद्योग के लिए एक बड़ी घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि:
✔ जल्द शुरू होंगे
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30 दिन का निःशुल्क ई-टूरिस्ट वीजा (रूसी नागरिकों के लिए)
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30 दिन का ग्रुप टूरिस्ट वीजा
इस कदम से दोनों देशों के बीच आवागमन बढ़ेगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी।

यूक्रेन मुद्दे पर भारत का स्पष्ट और संतुलित रुख
यूक्रेन संकट पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की नीति दोहराई:
“यूक्रेन के संबंध में भारत ने शुरुआत से शांति का पक्ष रखा है। हम शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के हर प्रयास का स्वागत करते हैं।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत संकट समाधान के लिए अपना योगदान देने को हमेशा तैयार रहा है और आगे भी रहेगा।
आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकता—दोनों नेताओं की सहमति
आतंकवाद पर दोनों देशों की स्थिति पूरी तरह एकजुट रही।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:
“पहलगाम हमला हो या क्रोकस सिटी हॉल पर कायराना हमला—इन घटनाओं की जड़ एक ही है। आतंकवाद मानवता पर सीधा प्रहार है और इसके विरुद्ध वैश्विक एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”
रूस और भारत लंबे समय से आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग करते आए हैं और आज की बैठक में इसे और मजबूत करने पर सहमति बनी।

रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और डिजिटल तकनीक—साझेदारी और मजबूत
दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, जिनमें शामिल हैं:
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रक्षा
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ऊर्जा
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व्यापार एवं निवेश
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अंतरिक्ष तकनीक
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परमाणु ऊर्जा
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डिजिटल टेक्नोलॉजी
इन क्षेत्रों में नई परियोजनाओं और समझौतों की भी संभावना बढ़ी है।
वैश्विक भू-राजनीति के बीच भारत–रूस साझेदारी को नया आयाम
राष्ट्रपति पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं।
भारत–रूस की दशकों पुरानी मित्रता एक बार फिर विश्व मंच पर मजबूती से उभर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
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यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेगी
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बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत–रूस संबंधों को एक नया आयाम मिलेगा
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व्यापार, कूटनीति और सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे










