उत्तराखण्ड आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को लेकर यह निर्णय 16 दिसंबर 2025 को देहरादून में लिया गया। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए, यूएलएमएमसी और यू-प्रिपेयर परियोजना के नव-नियुक्त कर्मचारियों के लिए आयोजित इंडक्शन प्रोग्राम में इसकी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि राज्य में कार्यरत प्रत्येक आपदा प्रबंधन कार्मिक के पास जीवन रक्षक बुनियादी कौशल होना आवश्यक है।
फर्स्ट रिस्पांडर के रूप में किया जाएगा तैयार
सचिव ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य कर्मचारियों को फर्स्ट रिस्पांडर के रूप में सक्षम बनाना है, ताकि आपदा के प्रारंभिक चरण में त्वरित, सुरक्षित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
यह प्रशिक्षण आपदा के दौरान जनहानि और क्षति को कम करने में सहायक होगा।
रेस्क्यू, फर्स्ट एड और CPR का व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कर्मचारियों को निम्न विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा:
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सर्च एंड रेस्क्यू तकनीक
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फर्स्ट एड और सीपीआर
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घायलों को सुरक्षित उठाना और स्थानांतरण
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रोप रेस्क्यू
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भार उठाना और स्थिर करना
CBRN आपात स्थितियों पर भी फोकस
इसके अलावा, केमिकल, रेडियोलॉजिकल, बायोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) आपात स्थितियों से निपटने के उपाय भी सिखाए जाएंगे।
भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, बादल फटना, हीट वेव और कोल्ड वेव जैसी आपदाओं में फर्स्ट रिस्पांडर की भूमिका पर विशेष जोर रहेगा।
यह प्रशिक्षण एसडीआरएफ और एनडीआरएफ जैसी विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा प्रदान किया जाएगा।
गोल्डन ऑवर में होगी प्रभावी सहायता
अपर सचिव एवं अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद स्वरूप ने कहा कि इस पहल से कर्मचारियों की भूमिका प्रशासनिक सहायता से आगे बढ़कर सक्रिय फील्ड रिस्पॉन्स तक विस्तारित होगी।
प्रशिक्षित कार्मिक आपदा के गोल्डन ऑवर में महत्वपूर्ण सहायता देकर नुकसान को न्यूनतम कर सकेंगे।
इंडक्शन प्रोग्राम में दी गई विभागीय जानकारी
इंडक्शन कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, राज्य और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (SEOC और DEOC) की संरचना और कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई।
सचिव सुमन ने कर्मचारियों को समर्पण के साथ कार्य करने और कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर उत्कृष्टता प्राप्त करने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी
कार्यक्रम में संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद ओबैदुल्लाह अंसारी, यू-प्रिपेयर के एस.के. बिरला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
यह पहल उत्तराखण्ड की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को संस्थागत रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, इससे राज्य की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता में दीर्घकालिक सुधार होगा।









