उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार बड़ा फैसला सामने आया है। लंबे समय से चल रही मांगों, विरोध प्रदर्शनों और परिवार के दबाव के बीच उत्तराखंड सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को इसकी औपचारिक घोषणा की।
सीएम धामी ने वीडियो संदेश में कहा कि स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता-पिता की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटी थी और सरकार शुरू से निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध रही है।
वायरल ऑडियो-वीडियो और VIP एंगल से भड़का आक्रोश
यह फैसला ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए ऑडियो और वीडियो क्लिप्स में कथित ‘VIP एंगल’ का जिक्र सामने आया था। इन खुलासों के बाद राज्यभर में फिर से प्रदर्शन तेज हो गए थे।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाते हुए CBI जांच की मांग तेज कर दी थी। कई जगहों पर धरना-प्रदर्शन और मशाल जुलूस भी निकाले गए।
क्या है पूरा मामला – संक्षिप्त बैकग्राउंड
अंकिता भंडारी (19 वर्ष) पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्यरत थीं।
सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर शव को चीला नहर में फेंक दिया गया था। आरोप था कि रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों ने अंकिता पर किसी वीआईपी मेहमान को “विशेष सेवा” देने का दबाव बनाया था। इंकार करने पर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई।
SIT जांच और उम्रकैद की सजा
मामले की जांच पहले उत्तराखंड पुलिस की SIT ने की थी। जांच के बाद तीनों आरोपियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
हालांकि, पीड़ित परिवार और कई संगठनों का आरोप रहा कि जांच में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया और VIP एंगल को दबा दिया गया।
परिवार की मांग पर सरकार का बड़ा कदम
अंकिता के माता-पिता लंबे समय से CBI जांच की मांग कर रहे थे। हाल ही में मुख्यमंत्री धामी ने खुद परिवार से मुलाकात कर उनकी बात सुनी थी। इसके ठीक अगले दिन CBI जांच की सिफारिश का ऐलान कर दिया गया।
परिवार ने इस फैसले का स्वागत किया है, हालांकि कुछ परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग भी रखी है।
अब केंद्र सरकार लेगी अंतिम फैसला
राज्य सरकार द्वारा भेजी गई सिफारिश पर अब केंद्र सरकार अंतिम निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और अंकिता को पूर्ण न्याय दिलाया जाएगा।
विपक्ष का आरोप – देर से लिया गया फैसला
इस फैसले के बाद राज्य में चल रहे तनाव में कुछ कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि विपक्षी दलों ने इसे “देर से लिया गया कदम” बताया है और आरोप लगाया है कि सरकार ने जनदबाव में आकर यह निर्णय लिया।
आगे की जांच से खुल सकते हैं बड़े राज
अब सभी की निगाहें CBI जांच पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि नई जांच से मामले से जुड़े कई अनसुलझे सवालों और VIP कनेक्शन से पर्दा उठ सकता है।











