देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि कुत्ते के काटने से घायल या मृत पीड़ितों को राज्य सरकारें मुआवजा देंगी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि बच्चे या बुजुर्ग कुत्तों के हमले में जख्मी होते हैं या उनकी मौत होती है, तो सीधी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी।
जस्टिस विक्रम नाथ की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने बेहद कड़े शब्दों में कहा:
“कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग इस घटना के जिम्मेदार होंगे। एक काम करो, कुत्तों को अपने घर लेकर जाओ। उन्हें इधर-उधर भटकने के लिए क्यों छोड़ा जाए, जिससे वे लोगों को डराते और काटते हैं।”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों का आतंक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
‘भावुकता सिर्फ कुत्तों के लिए?’ कोर्ट की फटकार
यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की दलीलों के बाद आई, जिन्होंने कहा था कि आवारा कुत्तों का मामला भावनात्मक मुद्दा है।
इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा:
“ये भावुकता सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिखाई पड़ती है।”
जवाब में मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि उन्हें लोगों की भी उतनी ही चिंता है।
बच्चों और बुजुर्गों को लेकर कोर्ट की विशेष चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
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बच्चे,
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बुजुर्ग,
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और महिलाएं
डॉग बाइट के मामलों में सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं।
यदि इन वर्गों के लोग जख्मी होते हैं या उनकी मृत्यु होती है, तो राज्य सरकारों को मुआवजा देना ही होगा।
पहले भी दिए जा चुके हैं सख्त निर्देश
गौरतलब है कि 7 नवंबर 2025 को भी सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि:
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सभी शैक्षणिक संस्थानों,
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अस्पतालों,
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बस स्टैंड,
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स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स,
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और रेलवे स्टेशनों
से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाया जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकारी और सार्वजनिक स्थानों में कुत्तों का प्रवेश रोका जाए।
देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामले
दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों में:
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डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं,
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रेबीज का खतरा बढ़ता जा रहा है,
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और लोग घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा करार दिया है।
राज्य सरकारों पर बढ़ा दबाव
इस फैसले के बाद अब:
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राज्य सरकारों को नसबंदी (ABC) अभियान तेज करना होगा,
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शेल्टर होम की व्यवस्था मजबूत करनी होगी,
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और आवारा कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई तेज करनी पड़ेगी।
वरना मुआवजे का बोझ सीधे सरकारी खजाने पर पड़ेगा।
जनता को क्या मिलेगा इस फैसले से?
इस ऐतिहासिक फैसले से:
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पीड़ितों को आर्थिक राहत मिलेगी,
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प्रशासन पर जवाबदेही तय होगी,
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और स्थानीय निकायों को लापरवाही छोड़नी पड़ेगी।
सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि: सुप्रीम कोर्ट का संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दे दिया है कि:
“जानवरों के अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इंसानों की जान उससे ऊपर है।”
अब यह देखना होगा कि राज्य सरकारें इस आदेश को कितनी गंभीरता से लागू करती हैं।







