ईरान में पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने अब खतरनाक मोड़ ले लिया है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने दावा किया है कि इन प्रदर्शनों में अब तक करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकारी के अनुसार, इन मौतों के लिए ‘आतंकवादी तत्व’ जिम्मेदार हैं, जो नागरिकों और सुरक्षा बलों दोनों को निशाना बना रहे हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है और मानवाधिकार संगठन मौतों की संख्या इससे कहीं अधिक बता रहे हैं।
प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि और मौतों का दावा
ईरान में ये विरोध प्रदर्शन शुरुआत में:
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हिजाब कानून,
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महंगाई,
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बेरोजगारी,
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और आर्थिक असमानता
को लेकर शुरू हुए थे।
लेकिन जल्द ही ये आंदोलन:
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सरकार विरोधी विद्रोह में बदल गए।
एक अनाम अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया:
“अब तक लगभग 2,000 लोग मारे गए हैं, जिनमें नागरिक और सुरक्षा बल दोनों शामिल हैं। इन मौतों के पीछे आतंकवादी संगठन हैं।”
सरकार का आरोप है कि:
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विदेश समर्थित समूह
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और आतंकी नेटवर्क
प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा फैला रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
ईरान सरकार के इस दावे पर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में:
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मौतों की संख्या 5,000 से 12,000 तक बताई जा रही है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य संगठनों का आरोप है कि:
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सुरक्षा बलों ने सीधी गोलियां चलाईं,
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मनमानी गिरफ्तारियां की गईं,
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और इंटरनेट बंद कर सूचनाएं दबाई गईं।
खामेनेई का बयान: ‘यह आतंकवाद है’
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने भी इन प्रदर्शनों को:
“आतंकवाद और विदेशी साजिश” करार दिया है।
उन्होंने कहा कि:
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दुश्मन देश ईरान को अस्थिर करना चाहते हैं,
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और जनता को सरकार के खिलाफ भड़का रहे हैं।
अमेरिका को खुली चेतावनी: ‘युद्ध के लिए तैयार हैं’
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है।
उन्होंने अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में कहा:
“हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन हम युद्ध के लिए तैयार हैं – पहले से भी ज्यादा।”
अराघची ने आगे कहा:
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अगर अमेरिका कोई सैन्य कदम उठाता है,
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तो ईरान मुंहतोड़ जवाब देगा।
ट्रंप के बयान और ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में:
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ईरान में हालात बिगड़ने पर
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‘मजबूत सैन्य प्रतिक्रिया’ की धमकी दी थी।
इसके जवाब में अराघची ने कहा:
“अगर अमेरिका ईरान को टेस्ट करना चाहता है, तो यह बातचीत नहीं, युद्ध का रास्ता होगा।”
ईरान ने:
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अमेरिका
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और इज़राइल
पर प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप भी लगाया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
इस घटनाक्रम के बाद:
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संयुक्त राष्ट्र ने हिंसा की निंदा की
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मानवाधिकार संगठनों ने स्वतंत्र जांच की मांग की
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अमेरिका ने नए प्रतिबंधों की बात कही
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वहीं चीन और रूस ने ईरान का समर्थन किया
विशेषज्ञों का मानना है कि:
“मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े युद्ध की कगार पर खड़ा है।”
क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ा
ईरान पहले से:
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इज़राइल,
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सऊदी अरब,
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और अमेरिका
के साथ तनाव में है।
अब आंतरिक संकट और बाहरी दबाव मिलकर:
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पूरे मध्य पूर्व को अस्थिरता के दौर में धकेल सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय: संवाद ही एकमात्र रास्ता
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि:
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अगर हालात पर काबू नहीं पाया गया,
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तो यह संकट क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
हालांकि:
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दोनों पक्षों के कड़े रुख के कारण
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संवाद की संभावना कमजोर दिख रही है।
निष्कर्ष: ईरान संकट अब वैश्विक चिंता
ईरान में 2,000 मौतों का दावा,
अमेरिका को युद्ध की चेतावनी,
और अंतरराष्ट्रीय दबाव –
ये सभी संकेत देते हैं कि:
ईरान का आंतरिक संकट अब वैश्विक संकट बनता जा रहा है।
अगर समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया,
तो इसका असर सिर्फ ईरान नहीं, पूरे विश्व पर पड़ेगा।











