ब्रिटिश एयरो-इंजन निर्माता रोल्स-रॉयस भारत को अपना तीसरा प्रमुख ‘होम मार्केट’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। ब्रिटेन के बाद यह भारत को कंपनी का तीसरा घरेलू बाजार बनाने का प्रयास है, जिससे जेट इंजन, नौसेना प्रणोदन (Naval Propulsion), लैंड सिस्टम्स और उन्नत इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में रोमांचक अवसर खुलेंगे।
इसकी जानकारी ब्रिटिश उच्चायोग (British High Commission) ने सोमवार, 13 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए साझा की। उच्चायोग ने लिखा:
“British aero-engine maker @RollsRoyce is looking to position India as its third ‘home market’ beyond the UK, unlocking exciting opportunities across jet engines, naval propulsion, and more! A clear reflection of the growing cooperation in advanced engineering & innovation.”
रोल्स-रॉयस की रणनीति और भारत की भूमिका
रोल्स-रॉयस के इंडिया एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट साशी मुकुंदन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कंपनी यूके के अलावा दो अन्य ‘होम मार्केट’—अमेरिका और जर्मनी—विकसित कर चुकी है और अब अगला लक्ष्य भारत है।
कंपनी की रणनीति भारत में:
-
डिजाइन,
-
डेवलपमेंट,
-
मैन्युफैक्चरिंग,
-
और सर्विसेज
में बड़े निवेश करने की है।
जेट इंजन: AMCA प्रोग्राम पर खास फोकस
रोल्स-रॉयस भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम के लिए नेक्स्ट-जेनरेशन जेट इंजन विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। AMCA भारत का पहला स्वदेशी 5th जनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट होगा, जिसके लिए हाई-थ्रस्ट, एडवांस टेक्नोलॉजी इंजन बेहद अहम है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रोल्स-रॉयस के साथ सहयोग से:
-
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तेज होगा,
-
स्वदेशी क्षमता बढ़ेगी,
-
और भारत को इंजन टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा।
नौसेना प्रणोदन और अन्य क्षेत्र
रोल्स-रॉयस भारत में केवल एविएशन तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी का फोकस इन क्षेत्रों पर भी है:
-
नौसेना प्रणोदन (Naval Propulsion):
भारतीय नौसेना के जहाजों और सबमरीनों के लिए उन्नत प्रोपल्शन सिस्टम। -
लैंड सिस्टम्स:
जैसे आर्जुन टैंक के इंजन और अन्य सैन्य प्लेटफॉर्म्स। -
सिविल एविएशन और पावर सिस्टम्स
-
हाई-टेक इंजीनियरिंग और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग
भारत में पहले से मजबूत मौजूदगी
रोल्स-रॉयस भारत में पहले से ही:
-
इंजीनियरिंग सेंटर्स,
-
सप्लाई चेन पार्टनरशिप्स,
-
और HAL, DRDO जैसी संस्थाओं के साथ सहयोग
कर रही है।
कंपनी का मानना है कि भारत की:
-
तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था,
-
विशाल और कुशल इंजीनियरिंग टैलेंट पूल,
-
और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी नीतियां
इसे एक आदर्श ‘होम मार्केट’ बनाती हैं।
ब्रिटिश उच्चायोग का संकेत: रक्षा और टेक सहयोग मजबूत
ब्रिटिश उच्चायोग की पोस्ट से साफ संकेत मिलता है कि यह कदम भारत-ब्रिटेन के बीच बढ़ते रक्षा और तकनीकी सहयोग का प्रमाण है। ‘होम मार्केट’ का दर्जा देने का मतलब है कि रोल्स-रॉयस भारत में:
-
लोकल मैन्युफैक्चरिंग,
-
जॉब क्रिएशन,
-
और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
पर ज्यादा फोकस करेगा।
यह सीधे तौर पर भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन से मेल खाता है।
निहितार्थ: डिफेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव
विशेषज्ञों का कहना है कि रोल्स-रॉयस जैसे ग्लोबल जायंट का भारत को ‘होम मार्केट’ बनाना:
-
विदेशी निवेश बढ़ाएगा,
-
स्वदेशी तकनीक विकास को गति देगा,
-
और भारत को वैश्विक एयरोस्पेस सप्लाई चेन में मजबूत खिलाड़ी बनाएगा।
AMCA जैसे प्रोजेक्ट्स को इससे नई रफ्तार मिल सकती है और भारत इंजन टेक्नोलॉजी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ सकता है।
आगे क्या?
रक्षा और उद्योग जगत के सूत्रों के मुताबिक, आने वाले महीनों में:
-
MoUs,
-
जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट्स,
-
और निवेश की औपचारिक घोषणाएं
हो सकती हैं।
रोल्स-रॉयस की यह महत्वाकांक्षा भारत की बढ़ती सैन्य और सिविल एविएशन जरूरतों को देखते हुए समय पर और रणनीतिक मानी जा रही है। यदि यह योजना जमीन पर उतरी, तो यह भारत और ब्रिटेन दोनों के लिए win-win साबित हो सकती है।








