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एनसीपीसीआर की सख्ती: गाजियाबाद स्कूलों में एनसीईआरटी उल्लंघन और भारी बैग पर नोटिस

BPC News National Desk
4 Min Read

बच्चों के स्कूल बैग के अत्यधिक वजन और एनसीईआरटी पाठ्यक्रम उल्लंघन को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने गाजियाबाद के जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर सख्त रुख अपनाया है। यह कार्रवाई इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन (IPA) की शिकायत पर हुई है, जिसमें जिले के कई निजी स्कूलों पर एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी और भारी किताबें अनिवार्य कराने का आरोप लगाया गया था।

जांच में क्या मिला?

एनसीपीसीआर की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गाजियाबाद के अनेक निजी विद्यालयों में:

  • एनसीईआरटी की निर्धारित पुस्तकों का पालन नहीं किया जा रहा है,

  • प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें अनिवार्य की जा रही हैं,

  • जिससे बच्चों के स्कूल बैग का वजन तय मानकों से काफी अधिक हो गया है,

  • और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि स्कूल बैग नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF)-2023 के अनुसार ही कक्षा-वार पाठ्यक्रम, समय-सारिणी और किताबें निर्धारित की जानी चाहिए। केवल एनसीईआरटी (या राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित समकक्ष) पाठ्यक्रम का ही अनुपालन अनिवार्य है।

डीएम को सख्त निर्देश

एनसीपीसीआर ने जिलाधिकारी को आदेश दिया है कि:

  • जिले के सभी निजी और सरकारी स्कूलों की जांच की जाए,

  • एनसीईआरटी पाठ्यक्रम और स्कूल बैग नीति का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए,

  • और नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि शैक्षिक सत्र 2026–27 से पहले सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

स्कूल बैग नीति-2020 क्या कहती है?

नीति के अनुसार:

  • स्कूल बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।

  • भारी बैग से बच्चों में पीठ दर्द, गर्दन दर्द, कंधों में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं,

  • जो उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर नकारात्मक असर डालती हैं।

एनसीईआरटी की किताबें हल्की और मानकीकृत होती हैं, जबकि निजी प्रकाशकों की किताबें अक्सर मोटी, महंगी और अनावश्यक सामग्री से भरी होती हैं।

IPA ने फैसले का किया स्वागत

आईपीए के महासचिव महिपाल रावत ने कहा:

“यह बच्चों और अभिभावकों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी शिकायत पर एनसीपीसीआर ने त्वरित कार्रवाई की, जो सराहनीय है। अब जरूरी है कि जिला प्रशासन जांच को तेज करे और दोषी स्कूलों पर सख्ती बरते।”

आईपीए के उपाध्यक्ष विनय कक्कड़ ने भी डीएम से मांग की कि:

  • सभी स्कूलों की तत्काल जांच हो,

  • और एनसीईआरटी पाठ्यक्रम एवं बैग वजन नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए।

अभिभावकों से अपील

आईपीए ने अभिभावकों से अपील की है कि वे:

  • अपने बच्चों के स्कूल बैग का वजन नियमित जांचें,

  • पढ़ाई जा रही किताबों की सूची देखें,

  • और किसी भी अनियमितता की सूचना एनसीपीसीआर, जिला शिक्षा अधिकारी या आईपीए को दें।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल गाजियाबाद, बल्कि पूरे देश में स्कूल बैग के बोझ को कम करने और शिक्षा को सस्ता व मानकीकृत बनाने की दिशा में अहम है। एनसीपीसीआर की इस सख्ती से उम्मीद है कि:

  • निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी,

  • बच्चों का शारीरिक और आर्थिक बोझ कम होगा,

  • और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व अनुशासन बढ़ेगा।

एनसीपीसीआर पहले भी कई बार स्कूल बैग वजन और पाठ्यक्रम उल्लंघन पर नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन गाजियाबाद में अब मामला जांच के दौर में पहुंच चुका है। अभिभावक संगठनों की सक्रियता से शिक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार की उम्मीद बढ़ गई है।

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