उत्तर प्रदेश पुलिस में स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा और मानवीय फैसला लिया गया है। पुलिस स्थापना बोर्ड, लखनऊ ने 2019 बैच के सिपाही और उपनिरीक्षक (दरोगा) को “अनुकम्पा के आधार” पर स्थानांतरण की अनुमति देने का निर्णय किया है। इसे लेकर पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी जिलों और इकाइयों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
अब तक 2019 बैच के बाद भर्ती पुलिसकर्मियों के मामलों में सामान्यतः अनुकम्पा के आधार पर ट्रांसफर पर विचार नहीं किया जाता था, लेकिन लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए यह राहत दी गई है।
पुलिस मुख्यालय का अहम आदेश
पुलिस महानिदेशक कार्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि अब कपल केस (पति-पत्नी दोनों पुलिस विभाग में कार्यरत) मामलों में 2019 बैच के सिपाही और दरोगा के स्थानांतरण प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। यह निर्णय उन पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो वर्षों से अपने जीवनसाथी के साथ एक ही स्थान पर तैनाती की मांग कर रहे थे।
कपल केस में मिलेगी विशेष छूट
आदेश के अनुसार:
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यदि पति-पत्नी दोनों उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं, तो उनके स्थानांतरण पर अनुकम्पा के आधार पर विचार किया जाएगा।
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ऐसे सभी प्रस्ताव सीधे पुलिस मुख्यालय को भेजे जाएंगे।
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कपल केस में दोनों के पुलिस पहचान पत्र और विवाह प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से संलग्न करना होगा।
मुख्यालय में तैनाती पर सख्ती
पुलिस मुख्यालय ने यह भी साफ किया है कि:
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2019 के बाद भर्ती उपनिरीक्षक और आरक्षी को सामान्यतः मुख्यालय में उपस्थिति की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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केवल वही 2019 बैच के कर्मी, जो कपल केस की श्रेणी में आते हैं, उन्हें ही मुख्यालय में उपस्थिति की अनुमति मिल सकेगी।
यह व्यवस्था मुख्यालय में अनावश्यक भीड़ और दबाव को नियंत्रित करने के लिए की गई है।
सेवा विवरण अनिवार्य
मुख्यालय में उपस्थित होने की अनुमति के साथ:
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संबंधित पुलिसकर्मी का पूरा सेवा रिकॉर्ड (Service Profile) अनिवार्य रूप से संलग्न करना होगा।
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यदि कर्मी पहले किसी विशेष इकाई जैसे—
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यातायात पुलिस
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यूपी-112
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न्यायालय सुरक्षा
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मुख्यमंत्री सुरक्षा
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अन्य विशेष शाखा
में तैनात रहा है, तो उसका स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
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पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत
इस फैसले से खासकर 2019 बैच के सिपाही और दरोगा, जो कपल केस में आते हैं, उन्हें बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि पति-पत्नी दोनों पुलिस में होने के बावजूद अलग-अलग जिलों में तैनाती से पारिवारिक जीवन प्रभावित होता है।
पुलिस विभाग के भीतर इस फैसले को मानवीय और संवेदनशील निर्णय माना जा रहा है, जिससे कार्यकुशलता और मानसिक संतुलन दोनों में सुधार आएगा।
क्यों अहम है यह फैसला?
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पारिवारिक एकता को बढ़ावा
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मानसिक तनाव में कमी
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कार्यस्थल पर संतुलन
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पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता में सुधार
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल प्रशासनिक रूप से सही है, बल्कि पुलिसकर्मियों के मानवाधिकार और पारिवारिक जीवन के सम्मान की दिशा में भी बड़ा कदम है।









