एडिलेड (ऑस्ट्रेलिया), 19 जनवरी 2026। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड शहर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां भारतीय मूल के 42 वर्षीय विक्रांत ठाकुर ने अदालत में स्वीकार किया कि वह अपनी पत्नी सुप्रिया ठाकुर की मौत के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन उन्होंने हत्या (मर्डर) के आरोप से इनकार किया है। एडिलेड मजिस्ट्रेट्स कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान विक्रांत ने वीडियो लिंक के माध्यम से पेश होकर कहा कि वह मैनस्लॉटर (गैर-इरादतन हत्या) के लिए दोषी हैं, लेकिन यह पूर्वनियोजित या इरादतन हत्या नहीं थी।
यह मामला ऑस्ट्रेलिया ही नहीं बल्कि भारतीय समुदाय के बीच भी गहरे सदमे और आक्रोश का कारण बना हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, 21 दिसंबर 2025 को नॉर्थफील्ड (एडिलेड के उत्तरी उपनगर) स्थित विक्रांत और सुप्रिया के घर से घरेलू हिंसा की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने 36 वर्षीय सुप्रिया ठाकुर को बेहोशी की हालत में पाया। पुलिस और मेडिकल टीम ने तुरंत सीपीआर दिया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद सुप्रिया को बचाया नहीं जा सका।
घटना के बाद विक्रांत ठाकुर को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मर्डर का आरोप लगाया गया।
पहली पेशी में नहीं मांगी जमानत, दूसरी पेशी में बदला प्लीडा
22 दिसंबर 2025 को हुई पहली पेशी में विक्रांत ने जमानत के लिए कोई आवेदन नहीं किया और मामले को आगे की जांच के लिए स्थगित किया गया।
14 जनवरी 2026 को दूसरी पेशी में, विक्रांत के वकील जेम्स मार्कस की सलाह पर उन्होंने अपना बयान बदला। अदालत में विक्रांत ने कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी की मौत का कारण बने, लेकिन यह हत्या नहीं थी।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा—
“मैं मैनस्लॉटर के लिए दोषी हूं, लेकिन मर्डर के लिए नहीं।”
हालांकि, अभियोजन पक्ष (प्रॉसीक्यूशन) ने इस प्लीडा को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते अब विक्रांत पर मर्डर का मुकदमा चलेगा और उन्हें ट्रायल का सामना करना पड़ेगा।
ट्रायल में तय होगा – मर्डर या मैनस्लॉटर?
अदालत में अब यह तय होगा कि सुप्रिया की मौत हत्या की श्रेणी में आती है या गैर-इरादतन हत्या (मैनस्लॉटर) में। पुलिस फोरेंसिक सबूतों, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के आधार पर मामले की गहराई से जांच कर रही है। अगली सुनवाई की तारीख जल्द तय की जाएगी।
सुप्रिया ठाकुर: एक समर्पित मां, अधूरा रह गया सपना
सुप्रिया ठाकुर को उनके दोस्त और परिचित एक मेहनती और समर्पित मां के रूप में याद कर रहे हैं। उनका सपना नर्स बनने का था और वह अपने इकलौते बेटे के लिए बेहतर भविष्य बनाना चाहती थीं।
दोस्तों द्वारा शुरू किए गए फंडरेज़र अभियान में लिखा गया—
“सुप्रिया एक समर्पित मां थीं। उन्होंने अपने बेटे के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए अथक मेहनत की। वह अक्सर लंबे समय तक काम करती थीं, ताकि अपने परिवार को बेहतर जीवन दे सकें।”
अब उनका बेटा बिना मां के रह गया है, और पूरा समुदाय उसके भविष्य को लेकर चिंतित है।
घरेलू हिंसा पर फिर उठे सवाल
यह मामला घरेलू हिंसा और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को फिर से उजागर करता है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के बीच भी इस घटना ने गहरा सदमा पैदा किया है। सामाजिक संगठनों ने महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू हिंसा के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है।








