देहरादून/चमोली, 19 जनवरी 2026। उत्तराखंड की आस्था से जुड़ी चारधाम यात्रा भले ही शीतकाल के कारण स्थगित हो चुकी हो, लेकिन श्रद्धा का सिलसिला थमा नहीं है। शीतकालीन चारधाम यात्रा (विंटर चारधाम) में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। नए साल की शुरुआत के साथ ही भक्तों की भारी आमद देखने को मिल रही है।
आंकड़ों के अनुसार, 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक शीतकालीन चारधाम यात्रा में 27 हजार से अधिक श्रद्धालु खरसाली, मुखबा, ऊखीमठ और पांडुकेश्वर/नरसिंह मंदिर पहुंचकर भगवान यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ के दर्शन कर चुके हैं।
शीतकालीन प्रवास स्थलों पर हो रही पूजा-अर्चना
मुख्य चारधामों के कपाट बंद होने के बाद देवताओं की पूजा उनके शीतकालीन प्रवास स्थलों पर होती है—
- यमुनोत्री देवी – खरसाली (यमुनोत्री घाटी के निकट)
- गंगोत्री धाम – मुखबा (हर्षिल के पास)
- केदारनाथ धाम – ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ
- बदरीनाथ धाम – पांडुकेश्वर और नरसिंह मंदिर, जोशीमठ
कड़ाके की ठंड और बर्फीले रास्तों के बावजूद श्रद्धालु बड़ी संख्या में इन स्थलों तक पहुंच रहे हैं, जो उत्तराखंड की गहरी आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा को दर्शाता है।
सरकार के प्रयासों से बढ़ा शीतकालीन चारधाम का आकर्षण
उत्तराखंड सरकार और पर्यटन विभाग द्वारा शीतकालीन चारधाम यात्रा को बढ़ावा देने के प्रयास रंग ला रहे हैं। बेहतर प्रचार-प्रसार, सुविधाओं में सुधार और सुरक्षा इंतजामों के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
2025 की मुख्य चारधाम यात्रा में 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, जिसमें—
- केदारनाथ: 17.68 लाख
- बदरीनाथ: 16 लाख से अधिक
दर्शन शामिल हैं। अब शीतकालीन यात्रा इस आस्था को साल भर बनाए रख रही है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती
शीतकालीन चारधाम यात्रा से स्थानीय लोगों को भी बड़ा लाभ मिल रहा है। होमस्टे, होटल, टैक्सी सेवा, स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प की बिक्री में तेजी आई है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को संबल मिला है।
श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी
उत्तराखंड पर्यटन विभाग और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि—
- यात्रा से पहले मौसम अपडेट जरूर देखें
- गर्म कपड़े, आवश्यक दवाइयां और ट्रैक्शन वाले जूते साथ रखें
- रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करें







