श्रीनगर गढ़वाल (उत्तराखंड)। पहाड़ी शहर श्रीनगर गढ़वाल को अब हॉर्न फ्री जोन और नो ओवरटेकिंग जोन के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है। नगर निगम श्रीनगर गढ़वाल ने बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस पहल से न केवल शहरवासियों को अनावश्यक शोर से राहत मिलेगी, बल्कि यातायात व्यवस्था भी अधिक सुरक्षित, अनुशासित और सुचारु हो सकेगी।
नगर निगम बोर्ड में प्रस्ताव लाने की तैयारी
नगर निगम सभागार में आयोजित एक अहम बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नगर निगम, जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मेयर आरती भंडारी ने बताया कि नगर निगम बोर्ड की आगामी बैठक में श्रीनगर गढ़वाल को औपचारिक रूप से हॉर्न फ्री और नो ओवरटेकिंग जोन घोषित करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। प्रस्ताव के पारित होते ही इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
ध्वनि प्रदूषण से राहत और स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर
शहरों में अनावश्यक हॉर्न बजाना ध्वनि प्रदूषण का एक बड़ा कारण बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे—
- मानसिक तनाव बढ़ता है
- सुनने की क्षमता प्रभावित होती है
- नींद की समस्या और उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ता है
- हृदय रोगों की संभावना बढ़ती है
श्रीनगर जैसे प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पहाड़ी शहर में हॉर्न का अत्यधिक प्रयोग शांति भंग करता है। हॉर्न फ्री जोन लागू होने से स्कूलों, अस्पतालों, बाजार क्षेत्रों और रिहायशी इलाकों में शांत वातावरण बनेगा, जिससे नागरिकों को प्रत्यक्ष स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।
नो ओवरटेकिंग जोन से बढ़ेगी सड़क सुरक्षा
नो ओवरटेकिंग जोन का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को रोकना है। पहाड़ी क्षेत्रों में संकरी सड़कें, तीखे मोड़ और सीमित दृश्यता के कारण ओवरटेकिंग बेहद खतरनाक साबित होती है।
इस नियम के लागू होने से—
- दुर्घटनाओं में कमी आएगी
- लेन ड्राइविंग को बढ़ावा मिलेगा
- यातायात जाम की स्थिति सुधरेगी
- ड्राइवरों में अनुशासन बढ़ेगा
विशेष रूप से मुख्य बाजार, स्कूल-कॉलेज मार्ग और अस्पतालों के आसपास यह नियम सख्ती से लागू किया जाएगा।
ऐसे होगा नियमों का क्रियान्वयन
नगर निगम और प्रशासन द्वारा इस पहल को सफल बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है—
चरणबद्ध लागूकरण
पहले चरण में चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों में नियम लागू किए जाएंगे।
जागरूकता अभियान
पोस्टर, बैनर, सोशल मीडिया, स्थानीय समाचार माध्यमों और जन संवाद कार्यक्रमों के जरिए लोगों को नियमों की जानकारी दी जाएगी।
निगरानी और सख्ती
नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
साइनेज और रोड मार्किंग
सड़कों पर स्पष्ट बोर्ड लगाए जाएंगे—Horn Free Zone और No Overtaking Zone।
नगर निगम की अपील: सहयोग करें शहरवासी
मेयर आरती भंडारी और नगर निगम प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस पहल में सहयोग करें।
उन्होंने कहा कि—
“अनावश्यक हॉर्न न बजाना और गलत ओवरटेकिंग से बचना केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक होने का प्रमाण है।”
उत्तराखंड के लिए बन सकता है मॉडल
यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो श्रीनगर गढ़वाल उत्तराखंड के अन्य शहरों के लिए मॉडल सिटी बन सकता है। पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में यह पहल राज्य में नई मिसाल कायम कर सकती है।







