वॉशिंगटन/पेरिस, 20 जनवरी 2026। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस को लेकर तीखा रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि फ्रांस ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से इनकार किया, तो अमेरिका फ्रेंच वाइन और शैम्पेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है। यह बयान ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया, जिससे अमेरिका-फ्रांस संबंधों में नई तनातनी देखने को मिल रही है।
ट्रंप का सख्त संदेश: टैरिफ को बनाया दबाव का हथियार
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“मैं उनकी वाइन और शैम्पेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा दूंगा और वह शामिल हो जाएगा। हालांकि, अगर वे नहीं भी आते हैं तो कोई फर्क नहीं पड़ता।”
यह टिप्पणी फ्रांस के उस फैसले के बाद आई है, जिसमें राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से इनकार कर दिया था। ट्रंप ने मैक्रों पर व्यक्तिगत हमला करते हुए उन्हें “कमजोर नेता” बताया और दावा किया कि उनकी अंतरराष्ट्रीय प्रभावशीलता घट रही है।
ट्रुथ सोशल पर मैक्रों का प्राइवेट मैसेज किया शेयर
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर मैक्रों के साथ हुई निजी बातचीत का एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया। इस संदेश में मैक्रों ने लिखा था—
“My friend, हम सीरिया पर पूरी तरह सहमत हैं। ईरान पर भी बड़े काम कर सकते हैं, लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि आप ग्रीनलैंड को लेकर क्या कर रहे हैं। आइए, बड़े काम करने की कोशिश करें।”
यह संदेश ऐसे समय सामने आया है, जब ट्रंप प्रशासन एक बार फिर ग्रीनलैंड को अमेरिका द्वारा खरीदने की संभावना पर चर्चा कर रहा है, जिसे यूरोपीय देशों और डेनमार्क ने सिरे से खारिज कर दिया है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ क्या है?
अमेरिका द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का उद्देश्य गाजा पट्टी में युद्ध के बाद—
- पुनर्निर्माण की निगरानी
- स्थायी युद्धविराम सुनिश्चित करना
- प्रशासनिक और विकास कार्यों का समन्वय
बताया गया है। ट्रंप प्रशासन इसे वैश्विक संघर्ष समाधान के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय मंच बता रहा है। इस बोर्ड में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों को आमंत्रित किया गया है।
हालांकि, फ्रांस ने इसे संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका को कमजोर करने वाला ‘समांतर ढांचा’ बताते हुए शामिल होने से इनकार कर दिया है। आलोचकों का दावा है कि बोर्ड को कथित तौर पर 1 बिलियन डॉलर की फंडिंग से जोड़ा जा रहा है और इसे ट्रंप की निजी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
फ्रांस और यूरोप की तीखी प्रतिक्रिया
ट्रंप की धमकी पर फ्रांस की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है।
- फ्रांस के कृषि मंत्री ने इसे “ब्लैकमेल” करार दिया।
- फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा कि इस तरह का दबाव “अस्वीकार्य और अप्रभावी” है।
- यूरोपीय संघ (EU) से अमेरिका के खिलाफ संयुक्त प्रतिक्रिया की मांग की गई है।
वाइन इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, यदि 200% टैरिफ लगाया गया तो फ्रांस को भारी आर्थिक नुकसान होगा, क्योंकि अमेरिका फ्रेंच वाइन और शैम्पेन का सबसे बड़ा बाजार है, जहां सालाना अरबों डॉलर का कारोबार होता है।
UN के जरिए ही गाजा पुनर्निर्माण पर अडिग फ्रांस
मैक्रों के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि फ्रांस गाजा के पुनर्निर्माण में योगदान देगा, लेकिन केवल संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत, न कि किसी वैकल्पिक या समानांतर बोर्ड के माध्यम से।
यूरोपीय देशों के बीच भी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर मतभेद हैं। कई देश इसे UN व्यवस्था के लिए चुनौती मान रहे हैं।
व्यापार युद्ध की वापसी के संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में टैरिफ आधारित व्यापार युद्धों की वापसी का संकेत हो सकता है। ट्रंप पहले भी टैरिफ को कूटनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं।
दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से ठीक पहले आया यह बयान अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव को और बढ़ा सकता है।







