अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर असंतोष अब सार्वजनिक रूप से सामने आ गया है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने पुष्टि की है कि उन्हें ट्रंप की ओर से एक कड़ा टेक्स्ट मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें नोबेल पुरस्कार न मिलने पर नाराजगी जताई गई और यह संकेत दिया गया कि अब अमेरिकी नीति में “केवल अमेरिका के हित” सर्वोच्च प्राथमिकता होंगे।
नॉर्वे पीएम के अनुसार, यह संदेश 18 जनवरी 2026 को भेजा गया था और यह ग्रीनलैंड तथा संभावित टैरिफ को लेकर नॉर्वे की आपत्तियों के जवाब में आया।
ट्रंप का संदेश: नोबेल से नाराजगी, नीति में सख्त रुख
ट्रंप के संदेश में लिखा गया कि उन्होंने “8 से अधिक युद्ध रुकवाने” में भूमिका निभाई, इसके बावजूद नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अब वे “केवल शांति” को अपनी बाध्यकारी प्राथमिकता मानने के लिए विवश नहीं हैं, बल्कि अमेरिका के लिए जो “उचित और सही” होगा, उसी पर विचार करेंगे।
मैसेज में ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि
“दुनिया तब तक सुरक्षित नहीं हो सकती जब तक ग्रीनलैंड पर हमारा पूर्ण और सम्पूर्ण नियंत्रण न हो।”
ग्रीनलैंड पर दबाव बढ़ाने की कोशिश
ट्रंप ने नॉर्वे से अपील की कि वह डेनमार्क पर दबाव बनाए ताकि ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने का रास्ता साफ हो सके। ट्रंप के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र सैन्य दृष्टि, प्राकृतिक संसाधनों (खनिज, ऊर्जा) और वैश्विक रणनीति के लिहाज से बेहद अहम है।
नॉर्वे के प्रधानमंत्री स्टोरे ने इस पर स्पष्ट किया कि नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे सरकार नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र नोबेल कमिटी प्रदान करती है। उन्होंने यह भी दोहराया कि नॉर्वे ग्रीनलैंड को डेनमार्क का स्वायत्त हिस्सा मानता है और इस मुद्दे पर डेनमार्क का समर्थन करता रहेगा।
यूरोप और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
डेनमार्क और ग्रीनलैंड प्रशासन ने ट्रंप की मांग को फिर सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ग्रीनलैंड “बिकने के लिए नहीं है।”
यूरोपीय संघ के भीतर भी इस संदेश को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि अमेरिका टैरिफ का सहारा लेता है तो EU लगभग 108 बिलियन डॉलर के अमेरिकी आयात पर जवाबी टैरिफ की तैयारी कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ट्रांसअटलांटिक संबंधों के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले यह मुद्दा और अधिक गर्माने की संभावना है।
नोबेल, NATO और अंतरराष्ट्रीय कानून पर सवाल
ट्रंप पहले भी सार्वजनिक रूप से यह कहते रहे हैं कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। अब इस नाराजगी को सीधे विदेश नीति और रणनीतिक मांगों से जोड़ना कई विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। उनका मानना है कि इससे NATO गठबंधन, अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति प्रयासों पर असर पड़ सकता है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप का यह संदेश केवल कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है या वास्तव में अमेरिकी नीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत। आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।







