भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लगभग दो दशकों से लंबित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस ऐतिहासिक डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह भारत की 1.4 अरब आबादी वाले विशाल बाजार को 27 यूरोपीय देशों के एकीकृत बाजार से जोड़ेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच आज होने वाले उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन में इस समझौते की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है।
“मदर ऑफ ऑल डील्स” क्यों?
कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल और यूरोपीय आयोग के ट्रेड कमिश्नर मारोस शेफकोविच ने इस डील को:
“Mother of All Trade Deals”
यानी सभी व्यापारिक समझौतों की सबसे बड़ी डील करार दिया है।
इस समझौते के तहत:
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90% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ हटेगा या घटेगा
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यूरोपीय कारों पर भारत में टैरिफ
110% से घटकर ~40% -
भारतीय उत्पादों को यूरोप में बड़ा फायदा:
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टेक्सटाइल
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फार्मास्यूटिकल्स
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इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स
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आईटी सर्विसेज
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ऑटो पार्ट्स
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भारत की नौवीं FTA, रणनीतिक समय पर
यह भारत की नौवीं FTA होगी। पिछले चार वर्षों में भारत:
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UK
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ओमान
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न्यूजीलैंड
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UAE
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ऑस्ट्रेलिया
जैसे देशों से पहले ही समझौते कर चुका है।
यह डील ऐसे समय पर आई है जब:
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ट्रंप प्रशासन ने भारत पर
50% तक टैरिफ लगाया है -
रूसी तेल खरीद पर
अतिरिक्त 25% शुल्क -
अमेरिका से व्यापारिक दबाव बढ़ा है
इस संदर्भ में भारत-EU समझौता
अमेरिका को सीधा रणनीतिक जवाब माना जा रहा है।
अमेरिका में मचा हड़कंप, ट्रंप नाराज
इस डील से अमेरिका में राजनीतिक भूचाल आ गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
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ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ मंत्री ने
यूरोप को “Betrayer (धोखेबाज)” कहा -
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर EU नेताओं पर हमला बोला
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कहा गया कि:
“EU भारत के साथ डील कर अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है”
विशेषज्ञों का मानना है कि:
यह डील ट्रंप की “America First” नीति के खिलाफ
बहुपक्षीय व्यापार (Multilateralism) का सबसे बड़ा जवाब है।
EU भारत के करीब क्यों आ रहा है?
EU भी अमेरिका से नाराज है क्योंकि:
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ट्रंप की टैरिफ नीतियां
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ग्रीनलैंड विवाद
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NATO पर दबाव
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यूरोप पर आर्थिक निर्भरता
इन कारणों से EU अब:
भारत को नया रणनीतिक साझेदार
मानकर चल रहा है।
भारत को क्या मिलेगा?
भारत के लिए फायदे:
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EU में शुल्क-मुक्त निर्यात
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टेक्सटाइल और फार्मा में बूम
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IT और डिजिटल सर्विसेज को बढ़त
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मैन्युफैक्चरिंग में निवेश
EU के लिए फायदे:
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भारत का 1.4 अरब उपभोक्ताओं वाला बाजार
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पहले से मौजूद 6000+ यूरोपीय कंपनियों को विस्तार
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ऑटोमोबाइल और ग्रीन टेक्नोलॉजी को एंट्री
वैश्विक प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार यह डील:
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अमेरिका-केंद्रित वैश्विक व्यापार को चुनौती
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भारत-EU को नया इकोनॉमिक ब्लॉक
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BRICS और G7 संतुलन बदलेगा
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रक्षा और टेक्नोलॉजी साझेदारी भी मजबूत होगी
कब लागू होगी डील?
हालांकि घोषणा आज हो सकती है, लेकिन:
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कानूनी स्क्रूटनी
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EU संसद की मंजूरी
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भारत की कैबिनेट अप्रूवल
में 5-6 महीने लग सकते हैं।
अनुमान:
यह डील 2027 तक पूरी तरह लागू हो जाएगी।
भू-राजनीतिक गेम-चेंजर
यह समझौता सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि:
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वैश्विक शक्ति संतुलन
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अमेरिका बनाम यूरोप-भारत धुरी
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बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था
का संकेत है।
ट्रंप को करारा जवाब – भारत-EU की यह डील
21वीं सदी के वैश्विक व्यापार की दिशा तय कर सकती है।








