यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों के विरोध में गाजियाबाद में करणी सेना और स्वर्ण समाज के कार्यकर्ताओं ने आज जिला कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए, नारेबाजी की और सिटी मजिस्ट्रेट संतोष उपाध्याय को ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों ने UGC के नए नियमों को समाज विरोधी बताते हुए इन्हें “काला कानून” करार दिया।
“UGC नियम समाज के अधिकारों पर हमला” – करणी सेना
करणी सेना के जिला अध्यक्ष राहुल सिंह ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा:
“यह UGC नियम समाज को बांटने और सामान्य वर्ग के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है। हम इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। अगर सरकार ने इसे वापस नहीं लिया तो हम देशव्यापी आंदोलन करेंगे।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यह आंदोलन सिर्फ गाजियाबाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।
स्वर्ण समाज की चेतावनी: “राजनीतिक नुकसान भुगतेगी सरकार”
स्वर्ण समाज के नेता विकास शर्मा ने कहा:
“अगर भाजपा सरकार इस काले कानून पर अड़ी रही तो उसे इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हमारा समाज अब जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि नए नियमों से:
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प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित होगी
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सामान्य वर्ग के छात्रों के अवसर कम होंगे
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शिक्षा में असंतुलन बढ़ेगा
सैकड़ों कार्यकर्ताओं की भागीदारी
प्रदर्शन में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और नारे लगाए:
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“UGC काला कानून वापस लो”
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“स्वर्ण समाज एकजुट है”
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“आरक्षण की आड़ में अन्याय नहीं चलेगा”
प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं और ज्ञापन सौंपा।
प्रशासन सतर्क, पुलिस बल तैनात
प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया था। हालांकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
सिटी मजिस्ट्रेट संतोष उपाध्याय ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा कि:
“यह ज्ञापन उच्च अधिकारियों तक भेजा जाएगा और संबंधित विभाग को अवगत कराया जाएगा।”
आंदोलन के और तेज होने के संकेत
यह प्रदर्शन गाजियाबाद में UGC नियमों के खिलाफ पहला बड़ा संगठित आंदोलन माना जा रहा है। करणी सेना और स्वर्ण समाज के नेताओं ने साफ संकेत दिए हैं कि:
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आंदोलन को और तेज किया जाएगा
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राज्य स्तर पर प्रदर्शन होंगे
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जरूरत पड़ी तो दिल्ली तक मार्च किया जाएगा
इस मुद्दे ने अब शिक्षा नीति से निकलकर राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है।








