गाजियाबाद जिला कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब अवैध अतिक्रमण और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर किसानों का प्रदर्शन पुलिस के साथ झड़प में बदल गया। बड़ी संख्या में किसान प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
अवैध अतिक्रमण से खेती और आवागमन प्रभावित
किसानों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों और खेतों के आसपास अवैध अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है। सड़कों, नहरों के किनारे और सार्वजनिक भूमि पर मकान, दुकानें और अन्य निर्माण होने से न केवल खेती योग्य भूमि प्रभावित हो रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन भी बाधित हो रहा है।
किसानों के अनुसार कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पा रही है।
आवारा पशुओं से फसलों को भारी नुकसान
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि आवारा पशु, विशेष रूप से गोवंश, खेतों में घुसकर फसलों को नष्ट कर रहे हैं। इससे किसानों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों का आरोप है कि पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजने की व्यवस्था कागजों तक सीमित है और जमीनी स्तर पर इसका असर नहीं दिख रहा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान पुलिस से हुई धक्का-मुक्की
किसान जिलाधिकारी से मिलकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इसी दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में डीजे के माध्यम से नारेबाजी शुरू हो गई और भीड़ बढ़ती चली गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हस्तक्षेप किया, जिसके दौरान धक्का-मुक्की हो गई।
कुछ किसानों ने पुलिस पर बल प्रयोग का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन का कहना है कि भीड़ को शांत करने के लिए न्यूनतम बल का इस्तेमाल करना पड़ा।
प्रशासन ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अफसरों ने स्थिति को संभालते हुए किसानों को शांत रहने की अपील की। अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि अवैध अतिक्रमण हटाने, आवारा पशुओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाने और फसल नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
संबंधित विभागों के साथ जल्द ही बैठक कर समाधान निकालने की बात कही गई है।
सुरक्षा व्यवस्था सख्त, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ आने-जाने वालों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
किसान नेताओं ने फिलहाल प्रदर्शन समाप्त कर दिया है, लेकिन चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदेश भर में किसानों की बढ़ती नाराजगी
यह घटना उत्तर प्रदेश के कई जिलों में किसानों की बढ़ती नाराजगी को दर्शाती है, जहां आवारा पशु और अवैध अतिक्रमण जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। किसान संगठनों का कहना है कि वे इस मुद्दे को अब राज्य स्तर पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि समस्या की गंभीरता को समझा जा रहा है और जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।







