राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष (शताब्दी वर्ष) पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कवि नगर रामलीला मैदान, गाजियाबाद में दोपहर 2:00 बजे से एक विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदू समाज में नई ऊर्जा, सामाजिक चेतना और एकता का संचार करना रहा। सम्मेलन में हजारों की संख्या में हिंदू समाज के लोगों की उपस्थिति ने सनातन संस्कृति और राष्ट्र प्रेम की सशक्त भावना को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।
आयोजन समिति के अथक प्रयासों से हुआ सफल आयोजन
यह भव्य आयोजन हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल, महासचिव डॉ. अतुल कुमार जैन एवं उनकी पूरी टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आयोजन की सुव्यवस्था, अनुशासन और जनसहभागिता ने इसे एक ऐतिहासिक आयोजन बना दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम में धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियां दी गईं।
इनमें समूह गान, देशभक्ति नृत्य, शिव तांडव स्तोत्र जैसी प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
साथ ही, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवियों द्वारा काव्य पाठ ने वातावरण को और भी ऊर्जावान बना दिया।
लखनऊ से प्रसिद्ध कवि कमल आग्नेय तथा कवि नगर गाजियाबाद की अंतरराष्ट्रीय स्तर की कवयित्री अंजू जैन ने सनातन धर्म, हिंदुत्व, राष्ट्र प्रेम, भारतीय संस्कृति और पंच परिवर्तन जैसे विषयों पर ओजस्वी कविताएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हिंदू समाज को संगठित होने का स्पष्ट संदेश
मुख्य वक्ताओं ने हिंदू समाज को जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने का आह्वान किया।
श्रद्धेय स्वामी दीपांकर जी ने कहा,
“हिंदुओं को जातियां छोड़कर एक रहना चाहिए। जिस प्रकार मुस्लिम का बच्चा मुस्लिम और ईसाई का बच्चा ईसाई होता है, उसी प्रकार हिंदू का बच्चा केवल हिंदू होना चाहिए। विदेशियों की नीति रही है कि जिसे तलवार से नहीं काटा जा सकता, उसे जातियों में बांट दो। लेकिन आज हिंदू जाग चुका है। अगर बंटोगे तो कटोगे, इसलिए जातिवाद छोड़कर सिर्फ हिंदू बनें।”
भारत के विश्वगुरु बनने से विश्व में शांति संभव
श्रद्धेय पवन सिन्हा ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि भारत विश्वगुरु बनता है, तो पूरी दुनिया में शांति स्थापित होगी।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में वीरता की कमी नहीं, बल्कि योजनाबद्ध संगठन की आवश्यकता है। आज हिंदू समाज संगठित हो रहा है, जिसमें स्वामी विवेकानंद और स्वामी दीपांकर जैसे महापुरुषों का योगदान अविस्मरणीय है।
धर्म समाज में दिखना चाहिए, केवल मंदिरों तक सीमित नहीं
श्रद्धेय जीवन ऋषि जी महाराज ने कहा,
“जीवन का सबसे बड़ा संकट भीतरी उदासीनता है। शरीर में केवल खून नहीं, संस्कार भी बहने चाहिए। धर्म मंदिरों में नहीं, बल्कि समाज में दिखना चाहिए। राष्ट्र को मजबूत बनाना और हिंदू होने पर गर्व करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार
इस अवसर पर श्रद्धेय अरविंद भाई ओझा, श्रद्धेय नवनीत प्रिय दास जी तथा
आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख श्री पदम जी ने भी हिंदुत्व, सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण पर प्रेरक विचार रखे।
मुख्य वक्ता के रूप में श्री पदम जी ने हिंदू समाज को जातीय भेदभाव से मुक्त होकर एकजुट रहने का संकल्प दोहराया।
आरती, अक्षत अर्पण और जलपान के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में आरती के पश्चात उपस्थित जनसमूह ने चित्र पर अक्षत अर्पित किए। इसके बाद सभी ने स्वादिष्ट जलपान का आनंद लिया।
कवि नगर के निवासियों एवं आयोजन समिति के सहयोग से यह सम्मेलन पूर्ण रूप से सफल रहा।
आयोजन समिति के पदाधिकारी
आयोजन समिति में
अध्यक्ष ललित जायसवाल, महासचिव डॉ. अतुल कुमार जैन, प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी अजय जैन, उपाध्यक्ष मनोज गोयल,
कोषाध्यक्ष प्रवीण गर्ग, जयप्रकाश अग्रवाल, संरक्षक बी.के. ढाढनिया, सह सचिव दीपाली जैन, अंजू जैन, साधना जैन,
तथा अन्य सदस्यगण जितेंद्र गुप्ता, सुभाष चंद्र, मुनीश गोयल, विकास बिंदल, प्रदीप गुप्ता, सरदार एस.पी. सिंह, अश्वनी गोयल, कैप्टन सुबोध गुप्ता, सोनू प्रकाश, सुशील शर्मा, अजय गुप्ता, आलोक गर्ग, डॉ. दिनेश अरोड़ा, दिनेश गर्ग, निर्मल जी, डॉ. हरीश गुप्ता, प्रदीप गर्ग, प्रीति मित्तल, मुकेश सिंगल सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे।
अध्यक्ष ललित जायसवाल एवं सचिव डॉ. अतुल कुमार जैन ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं और उपस्थित बंधुओं का आभार व्यक्त किया।
यह सम्मेलन आरएसएस शताब्दी वर्ष में हिंदू जागरण और एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।









