अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर शेयर किए गए एक वीडियो ने देशभर में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को जंगल में वानरों (प्राइमेट्स) के रूप में दिखाया गया था, जिसे व्यापक रूप से एक नस्लवादी ट्रोप के रूप में देखा जा रहा है।
यह वीडियो गुरुवार रात लगभग 11:44 बजे (ईस्टर्न टाइम) पोस्ट किया गया और करीब 12 घंटे तक ऑनलाइन रहा। शुक्रवार को भारी आलोचना और बैकलैश के बाद इसे डिलीट कर दिया गया।
AI-जनरेटेड वीडियो से बढ़ा विवाद
वीडियो में मशहूर गीत “The Lion Sleeps Tonight” के साथ एक AI-जनरेटेड क्लिप दिखाई गई थी, जिसमें ओबामा दंपति के चेहरे वानरों के शरीर पर सुपरइम्पोज किए गए थे।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो मूल रूप से 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में कथित धांधली के झूठे दावों को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था, लेकिन अंत में इसमें नस्लवादी दृश्य जोड़े गए।
व्हाइट हाउस का बचाव, फिर पोस्ट हटाने की सफाई
शुरुआत में व्हाइट हाउस ने इस वीडियो को एक “इंटरनेट मीम” बताते हुए आलोचनाओं को “फेक आउट्रेज” करार दिया।
हालांकि, बढ़ते दबाव के बाद यह कहा गया कि यह पोस्ट एक स्टाफ सदस्य की गलती से शेयर हो गया था, जिसके चलते इसे हटा दिया गया।
ट्रंप ने माफी से किया इनकार
शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा,
“मैंने कोई गलती नहीं की। मैंने वीडियो का पूरा हिस्सा नहीं देखा था, केवल शुरुआत देखी थी। पोस्ट स्टाफ ने किया।”
ट्रंप ने इस घटना को “मिस्टेक” मानने से भी इनकार कर दिया।
डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स दोनों की कड़ी प्रतिक्रिया
इस वीडियो पर दोनों राजनीतिक दलों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
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डेमोक्रेट्स ने इसे खुला और घृणित नस्लवाद बताया
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कई रिपब्लिकन सीनेटरों — जिनमें रॉजर विकर और टिम स्कॉट शामिल हैं — ने भी इसे “अस्वीकार्य” और “नस्लवादी” करार देते हुए पोस्ट हटाने और माफी की मांग की
इसके अलावा NAACP और अन्य सिविल राइट्स संगठनों ने भी कड़ी निंदा की, खासकर ब्लैक हिस्ट्री मंथ के दौरान इस घटना को बेहद आपत्तिजनक बताया गया।
ट्रंप की सोशल मीडिया रणनीति फिर सवालों के घेरे में
यह विवाद ट्रंप की उस सोशल मीडिया रणनीति से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें वे बार-बार 2020 चुनाव में धांधली के दावे दोहराते रहे हैं—जिन्हें अदालतें और उनके ही पूर्व अटॉर्नी जनरल पहले खारिज कर चुके हैं।
हालांकि वीडियो हटा दिया गया है, लेकिन इस घटना ने अमेरिकी राजनीति में नस्लवाद, AI कंटेंट और सोशल मीडिया की भूमिका पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला ट्रंप की “टेफ्लॉन इमेज” की सीमाओं की परीक्षा है, जबकि उनके समर्थक इसे केवल स्टाफ की गलती बता रहे हैं।









