बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले देश की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नया विवाद सामने आया है। भारतीय अडानी ग्रुप ने बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) को पत्र लिखकर बकाया बिजली बिलों का तत्काल भुगतान करने की मांग की है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि यदि भुगतान नहीं किया गया, तो बिजली की निरंतर सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे लोडशेडिंग और ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है।
अडानी पावर लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट अविनाश अनुराग द्वारा 29 जनवरी को लिखे गए पत्र के अनुसार, BPDB पर कुल 112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1,000 करोड़ रुपये) का बकाया है। इसमें जून 2025 तक का लेट पेमेंट सरचार्ज 53.2 मिलियन डॉलर और अक्टूबर में दी गई बिजली के लिए 59.6 मिलियन डॉलर शामिल हैं।
कंपनी का कहना है कि पिछले महीने BPDB ने केवल 39.2 मिलियन डॉलर का भुगतान किया, जबकि कई बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद पूरा बकाया नहीं चुकाया गया।
भुगतान में देरी से ऑपरेशन पर दबाव
अडानी ग्रुप ने पत्र में कहा है कि लगातार भुगतान में देरी से कंपनी पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है, और यदि यह स्थिति बनी रही तो पावर प्लांट का नियमित संचालन और उत्पादन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। कंपनी पहले भी ऐसी चेतावनियां जारी कर चुकी है।
वर्ष 2024–25 में बकाया बिलों के चलते बांग्लादेश को दी जाने वाली बिजली सप्लाई करीब 50% तक घटा दी गई थी, उस समय बकाया राशि 800 मिलियन डॉलर से अधिक बताई गई थी।
चुनावी माहौल में बढ़ी चिंता
यह मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब बांग्लादेश संसदीय चुनाव और संवैधानिक रेफरेंडम की तैयारी कर रहा है। अंतरिम सरकार के तहत हो रहे इन चुनावों में ऊर्जा संकट किसी भी नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी और रमजान के दौरान लोडशेडिंग का खतरा और बढ़ सकता है। बांग्लादेश इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (BIPPA) के अनुसार, BPDB पर कुल बकाया राशि लगभग 14,000 करोड़ टका तक पहुंच चुकी है।
गोड्डा प्लांट और टैरिफ विवाद
अडानी के झारखंड स्थित गोड्डा पावर प्लांट से बांग्लादेश को करीब 1,600 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जाती है, जो देश की कुल जरूरतों का अहम हिस्सा है। हालांकि, इस डील को लेकर ओवरप्राइसिंग, कोयले की लागत और टैरिफ पर लंबे समय से विवाद चल रहा है।
बांग्लादेश सरकार की एक समिति की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अडानी से बिजली खरीद पर करीब 40% अधिक कीमत चुकाई जा रही है।
आगे क्या?
अडानी ग्रुप का कहना है कि वह अनुबंध की शर्तों का पालन कर रहा है, लेकिन भुगतान में देरी से लेंडर्स का दबाव बढ़ रहा है। कंपनी ने BPDB से समयबद्ध भुगतान का स्पष्ट रोडमैप मांगा है।
चुनाव से ठीक पहले आई यह चेतावनी बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा और भारत-बांग्लादेश आर्थिक संबंधों पर नए सवाल खड़े कर रही है। अब सबकी नजर BPDB और अंतरिम सरकार के अगले कदम पर टिकी है।








