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नमो भारत कॉरिडोर के आसपास टीओडी को बढ़ावा देने के लिए NCRTC और SPA दिल्ली के बीच एमओयू

BPC News National Desk
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोरों के आसपास ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) को मजबूती देने के उद्देश्य से नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) दिल्ली के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

यह एमओयू 9 फरवरी 2026 को NCRTC के प्रबंध निदेशक श्री शलभ गोयल और SPA दिल्ली के निदेशक प्रो. डॉ. वी.के. पॉल की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया। इस साझेदारी का लक्ष्य नमो भारत कॉरिडोरों और स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों में भूमि उपयोग और परिवहन नियोजन का एकीकृत मॉडल विकसित करना है, जिससे क्षेत्र का विकास व्यवस्थित, सतत और यात्री-अनुकूल बन सके।

टीओडी क्या है और क्यों जरूरी है

ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) एक आधुनिक शहरी नियोजन अवधारणा है, जिसमें सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास उच्च घनत्व, मिश्रित उपयोग और पैदल-अनुकूल विकास को प्रोत्साहित किया जाता है। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होती है, ट्रैफिक जाम घटता है और पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव भी कम होता है।

टीओडी के तहत आवासीय, व्यावसायिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे को एक साथ विकसित किया जाता है, जिससे लोगों को काम, शिक्षा और सेवाओं तक आसान पहुंच मिल सके। इससे दैनिक यात्रा अधिक सुगम, समय-बचत वाली और किफायती बनती है।

NCRTC और SPA दिल्ली की भूमिका

इस एमओयू के तहत SPA दिल्ली, जिसे आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा शहरी नियोजन एवं डिजाइन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित किया गया है, NCRTC के लिए नॉलेज पार्टनर के रूप में कार्य करेगा। SPA दिल्ली सर्वेक्षण, स्थानिक विश्लेषण, स्टेकहोल्डर परामर्श, नीति निर्माण और शहरी डिजाइन से जुड़े तकनीकी सुझाव उपलब्ध कराएगा।

वहीं NCRTC अपने क्षेत्रीय परिवहन अनुभव और इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञता के माध्यम से टीओडी को जमीन पर उतारने का कार्य करेगा। दोनों संस्थाएं मिलकर लैंड वैल्यू कैप्चर (LVC) जैसे वित्तीय तंत्रों को भी मजबूत करने पर काम करेंगी, ताकि परियोजनाओं की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

छह-सूत्रीय टीओडी कार्ययोजना

एमओयू के तहत टीओडी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक छह-सूत्रीय ढांचा तय किया गया है, जिसमें शामिल हैं:

  • टीओडी कॉरिडोर की पहचान

  • प्रभाव क्षेत्र (Influence Zone) की अधिसूचना

  • स्थानीय क्षेत्र योजनाओं का निर्माण

  • भूमि और संपत्ति का विस्तृत इन्वेंट्रीकरण

  • संभावित विकास क्षेत्रों की पहचान

  • आवश्यक नीतिगत और नियामकीय सहयोग सुनिश्चित करना

नमो भारत परियोजना का महत्व

नमो भारत भारत का पहला हाई-स्पीड और हाई-फ्रीक्वेंसी रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम है, जिसका उद्देश्य एनसीआर के प्रमुख शहरों को तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय परिवहन से जोड़ना है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर इस प्रणाली का पहला चरण है, जिसमें डीपीआर स्तर से ही टीओडी और लैंड वैल्यू कैप्चर के प्रावधान शामिल किए गए हैं।

इसके अलावा दिल्ली-गुरुग्राम-बावल और दिल्ली-पानीपत-करनाल जैसे अन्य प्राथमिकता कॉरिडोरों को भी जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है, जहां इस मॉडल को आगे बढ़ाया जाएगा।

सतत शहरी विकास की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी एनसीआर में बेहतर कनेक्टिविटी, कम ट्रैफिक जाम, पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली और संतुलित आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी। टीओडी मॉडल न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक साबित होगा, बल्कि नमो भारत कॉरिडोरों के आसपास के क्षेत्रों में रोजगार, निवेश और जीवन स्तर में भी सुधार लाएगा।

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