उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद पर विधानसभा में सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है।
उन्होंने कहा कि “हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता” और मर्यादा का पालन सभी के लिए अनिवार्य है।
क्या है पूरा विवाद
यह मामला प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान सामने आया।
मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे।
लेकिन प्रशासन ने उन्हें एग्जिट गेट से प्रवेश करने से रोक दिया और पैदल जाने को कहा।
इससे नाराज होकर उन्होंने विरोध जताया और स्नान का बहिष्कार कर दिया।
विधानसभा में CM योगी का बयान
13 फरवरी 2026 को बजट सत्र के दौरान सीएम योगी ने कहा:
• शंकराचार्य पद सनातन धर्म का सर्वोच्च पद है
• यह परंपरा आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों से जुड़ी है
• कोई भी व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता
उन्होंने कहा कि माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालु मौजूद थे और एग्जिट गेट से प्रवेश भगदड़ का कारण बन सकता था।
“कानून सबके लिए समान”
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा:
• कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं
• मैं भी कानून से ऊपर नहीं हूं
• मर्यादा का पालन सभी को करना होगा
सपा पर निशाना
सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि यदि वे स्वामी को शंकराचार्य मानते हैं तो पहले उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों हुई थी।
विवाद का व्यापक असर
यह मुद्दा अब तीन बड़े सवालों पर चर्चा का केंद्र बन गया है:
• धार्मिक पदों की वैधता
• प्रशासनिक नियमों की सीमा
• कानून बनाम धार्मिक अधिकार








