गाजियाबाद: डासना जेल में बंदियों के पुनर्वास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनोखी पहल की जा रही है। यहां जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को रेडियो जॉकी (RJ) की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे वे रिहाई के बाद रोजगार हासिल कर रहे हैं।
जेल परिसर में संचालित रेडियो स्टेशन पर भजन कैप्सूल, मोटिवेशनल कहानियां, जीवन चरित्र, माइथोलॉजी लेसन, ‘संवेदना प्रसारण’, ‘आपकी फरमाइश’, सदाबहार गाने और संध्या भजन जैसे कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं।
रेडियो परवाज़ बना बदलाव का माध्यम
जिला कारागार गाजियाबाद में स्वयंसेवी संस्था India Vision Foundation के सहयोग से “रेडियो परवाज़” नामक जेल रेडियो स्टेशन संचालित किया जा रहा है।
इस रेडियो स्टेशन की खास बात यह है कि:
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इसका संचालन पूरी तरह बंदी करते हैं
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बंदी ही अन्य कैदियों को प्रशिक्षण देते हैं
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कार्यक्रमों के जरिए मानसिक और सामाजिक सुधार का प्रयास होता है
बंदियों को दी जाती है प्रोफेशनल ट्रेनिंग
रेडियो जॉकी प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को कई महत्वपूर्ण कौशल सिखाए जाते हैं:
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स्क्रिप्ट लेखन
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आवाज में उतार-चढ़ाव
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सही उच्चारण
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रिकॉर्डिंग तकनीक
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रेडियो प्रोग्राम प्रस्तुति
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स्टेशन संचालन
जेल प्रशासन के अनुसार पिछले वर्ष 20 से अधिक बंदी RJ प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और कई रिहा होने के बाद रेडियो स्टेशनों में नौकरी भी कर रहे हैं।
रिहाई के बाद नौकरी दिलाने में मदद
जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने बताया कि प्रशासन सिर्फ ट्रेनिंग ही नहीं देता, बल्कि बंदियों को रिहाई के बाद नौकरी दिलाने में भी सहयोग करता है।
उन्होंने एक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि:
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दहेज हत्या के आरोप में बंद एक कैदी को RJ ट्रेनिंग दी गई
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जेल रेडियो स्टेशन पर उसे अनुभव मिला
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जमानत के बाद वह प्रतिष्ठित रेडियो स्टेशन में RJ बन गया
‘संवेदना प्रसारण’ बना सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम
रेडियो “परवाज़” का उद्देश्य बंदियों के मानसिक और भावनात्मक पुनर्वास में मदद करना है।
विशेष कार्यक्रम “संवेदना प्रसारण” में बंदी:
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अपने अनुभव साझा करते हैं
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सामाजिक संदेश देते हैं
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अन्य बंदियों को प्रेरित करते हैं
वहीं “आपकी फरमाइश” और संगीत कार्यक्रम मनोरंजन का माध्यम बनते हैं।
पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम
जेल प्रशासन का मानना है कि ऐसी सकारात्मक गतिविधियां बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करती हैं।
रेडियो जॉकी ट्रेनिंग जैसी पहल न सिर्फ रोजगार के अवसर पैदा कर रही है बल्कि बंदियों के जीवन में नई उम्मीद और बदलाव भी ला रही है।








