गाजियाबाद में शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25% आरक्षित सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया के प्रथम चरण को लेकर गंभीर अव्यवस्थाओं के आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन (GPA) ने सख्त रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन को विस्तृत सुझाव पत्र सौंपा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
“कागजी सीटों का खेल” — GPA का आरोप
एसोसिएशन के आरटीई प्रभारी धर्मेंद्र कुमार यादव के अनुसार, कई निजी स्कूल पोर्टल पर अपनी सीटों को “फुल” दिखा देते हैं, जबकि वास्तव में कई सीटें खाली रहती हैं। दस्तावेजों की कमी या अन्य कारणों से चयनित बच्चों का दाखिला नहीं हो पाता और बाद में इन सीटों को कथित तौर पर गुपचुप तरीके से मैनेज कर लिया जाता है।
GPA का कहना है कि यह व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र बच्चों के साथ अन्याय है और उनके संवैधानिक शिक्षा अधिकार का उल्लंघन भी है।
GPA की प्रमुख मांगें
1️⃣ वास्तविक सीट डेटा सार्वजनिक हो
प्रथम चरण के बाद हर स्कूल की वास्तविक खाली सीटों की सूची शिक्षा विभाग की वेबसाइट और स्कूल नोटिस बोर्ड पर तुरंत जारी की जाए।
2️⃣ वेटिंग लिस्ट को प्राथमिकता
चयन से वंचित बच्चों के लिए स्पष्ट प्रतीक्षा सूची बनाई जाए, ताकि सीट खाली होते ही उन्हें प्रवेश दिया जा सके।
3️⃣ आवेदन स्थिति की पारदर्शिता
अभिभावकों को ऑनलाइन यह जानकारी मिले कि उनका आवेदन किस स्तर पर है और क्यों रुका हुआ है।
4️⃣ द्वितीय चरण में निष्पक्ष लॉटरी
दूसरे चरण की लॉटरी केवल वास्तविक खाली सीटों पर ही कराई जाए।
5️⃣ शत-प्रतिशत सीट भरना अनिवार्य
कोई भी आरटीई सीट खाली न रहे। सीट छिपाने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई हो।
6️⃣ सत्यापन प्रक्रिया की जांच
दस्तावेज सत्यापन में अनियमितताओं की शिकायतों को देखते हुए रैंडम ऑडिट कराने की मांग की गई है।
एसोसिएशन का बयान
GPA सचिव अनिल सिंह ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कोई खैरात नहीं बल्कि हर गरीब बच्चे का कानूनी हक है। यदि कोई स्कूल डेटा साझा नहीं करता या प्रवेश देने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ मान्यता रद्द तक की कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
एसोसिएशन पदाधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे जागरूक रहें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत प्रशासन या GPA को दें।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा
आरटीई कानून का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही, तो हजारों पात्र बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
GPA का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








