दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) प्रशासन ने कैंपस में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए 17 फरवरी 2026 से एक महीने तक सभी प्रकार के प्रदर्शन, रैली, धरना और विरोध गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
प्रॉक्टर ऑफिस द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि अनियंत्रित सार्वजनिक जुटान से ट्रैफिक बाधित होने, मानव जीवन को खतरा और शांति भंग होने की आशंका रहती है, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
आदेश की मुख्य बातें
प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार कैंपस में निम्न गतिविधियों पर रोक रहेगी:
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पब्लिक मीटिंग, जुलूस और धरना प्रदर्शन
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पांच या अधिक लोगों की भीड़ जुटाना
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नारेबाजी और भाषण देना
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मशाल या खतरनाक सामग्री ले जाना
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ऐसी गतिविधियां जो आवाजाही या शांति को प्रभावित करें
यह प्रतिबंध 17 मार्च 2026 तक लागू रहेगा, जब तक इसे पहले वापस न लिया जाए।
UGC इक्विटी रेगुलेशंस विवाद बना वजह
यह फैसला हाल ही में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद लिया गया है।
पिछले दिनों आर्ट्स फैकल्टी और मॉरिस नगर इलाके में छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं, जिनमें पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और क्रॉस-एफआईआर दर्ज हुईं।
छात्रों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
कई छात्र संगठनों और शिक्षक संघों ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है। उनका कहना है कि इससे छात्रों की आवाज दबेगी और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होगी।
प्रशासन का पक्ष
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह अस्थायी कदम है, जिसका उद्देश्य:
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शैक्षणिक गतिविधियों को बाधारहित रखना
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छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
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कैंपस में शांति बनाए रखना
छात्रों के लिए जारी सलाह
प्रशासन ने छात्रों से नियमों का पालन करने और किसी भी अनधिकृत गतिविधि से दूर रहने की अपील की है। आदेश का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
छात्र राजनीति के केंद्र में DU
नई दिल्ली स्थित दिल्ली यूनिवर्सिटी लंबे समय से छात्र राजनीति और सामाजिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रही है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि यह प्रतिबंध कैंपस में शांति लाता है या नई बहस को जन्म देता है।







