उत्तर प्रदेश बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के बीच गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से चिंताजनक घटना सामने आई है। परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद दर्जनों छात्र दुपहिया वाहनों पर सवार होकर सड़कों पर बेलगाम दौड़ लगाने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक-एक स्कूटर और बाइक पर चार-चार युवक सवार थे, जो शोर मचाते हुए महिलाओं और छात्राओं के सामने अश्लील इशारे करते नजर आए।
परीक्षा केंद्र के बाहर बना अफरातफरी का माहौल
घटना दोपहर की पाली की परीक्षा खत्म होने के बाद की बताई जा रही है। लोनी इंटर कॉलेज के बाहर परीक्षा देकर निकल रही छात्राएं मौजूद थीं, तभी आसपास के कॉलेजों के युवक दुपहिया वाहनों के साथ वहां पहुंचे।
उन्होंने तेज हॉर्न बजाए, शोर मचाया और फिर काफिले की शक्ल में लोनी कोतवाली की ओर बढ़ गए। इस दौरान सड़क पर यातायात बाधित हुआ, लेकिन मौके पर पुलिस या ट्रैफिक अधिकारी मौजूद नहीं दिखे।

कानून और सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना कई सवाल खड़े करती है:
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क्या परीक्षा खत्म होने के बाद ऐसा उन्माद सामान्य है?
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क्या कानून का डर खत्म होता जा रहा है?
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क्या यह सिर्फ लापरवाही है या माहौल बिगाड़ने की कोशिश?
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी हरकतें यातायात नियमों का उल्लंघन होने के साथ महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा हैं।

किन धाराओं में बनता है मामला
ऐसे मामलों में निम्न कानून लागू हो सकते हैं:
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IPC धारा 279 — लापरवाही से वाहन चलाना
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IPC धारा 294 — सार्वजनिक स्थल पर अश्लील हरकत
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मोटर वाहन अधिनियम — ओवरलोडिंग और खतरनाक ड्राइविंग
फिर भी, घटना के दौरान पुलिस की अनुपस्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।
स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं के समय ऐसी घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन इस बार छात्रों का व्यवहार अधिक संगठित और बेखौफ दिखाई दिया।
घनी आबादी वाले लोनी क्षेत्र में पहले से ट्रैफिक जाम और अपराध की समस्याएं हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती हैं।
प्रशासन से उठी ये प्रमुख मांगें
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परीक्षा केंद्रों के बाहर विशेष पुलिस तैनाती
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दुपहिया ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई
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स्कूलों द्वारा छात्रों की काउंसलिंग
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जरूरत पड़ने पर अभिभावकों को जिम्मेदार ठहराना

अनुशासन भी है उतना ही जरूरी
परीक्षा पास होना खुशी की बात है, लेकिन सड़कों पर हुड़दंग और दूसरों की सुरक्षा से खिलवाड़ स्वीकार्य नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि समाज, स्कूल और प्रशासन को मिलकर ऐसी घटनाओं पर सख्ती से लगाम लगानी होगी।






