रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही राजधानी नई दिल्ली में एक नई राजनीतिक और सामाजिक बहस शुरू हो गई है। AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शोएब जमई ने दिल्ली सरकार से मांग की है कि रमजान के दौरान राजधानी में सभी शराब की दुकानें बंद की जाएं।
उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर शराब की बिक्री और सेवन पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की अपील की है।
सोशल मीडिया पर की अपील
शोएब जमई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“हम दिल्ली सरकार से अपील करते हैं कि रमज़ान के पवित्र महीने में दिल्ली की सभी शराब की दुकानें बंद कर दी जाएं। सार्वजनिक जगहों पर शराब की बिक्री और पीने पर रोक लगनी चाहिए।”
उन्होंने अपनी मांग की तुलना सावन महीने से करते हुए कहा कि:
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सावन में कई जगहों पर धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए मांसाहारी दुकानों पर रोक लगती है
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इसी तरह रमजान में भी धार्मिक संवेदनशीलता का सम्मान होना चाहिए
धार्मिक भावनाओं का हवाला
AIMIM नेता का कहना है कि:
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रमजान इस्लाम में बेहद पवित्र महीना है
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इस दौरान रोजा, इबादत और संयम पर विशेष जोर होता है
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शराब इस्लाम में “हराम” मानी जाती है
इसी वजह से उन्होंने सरकार से इस अवधि में शराब बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है।
समर्थन में तर्क:
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धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए
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समानता के आधार पर निर्णय होना चाहिए
विरोध में तर्क:
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इसे राजनीतिक स्टंट बताया जा रहा
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राज्य की नीतियां धर्म आधारित नहीं होनी चाहिए
केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
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शराब पर रोक लगाना राज्य सरकार का अधिकार है
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धार्मिक आधार पर फैसले लेना उचित नहीं
दिल्ली सरकार की स्थिति
अब तक दिल्ली सरकार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दिल्ली में शराब की बिक्री पहले से ही एक्साइज पॉलिसी के तहत नियंत्रित है और:
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रमजान या अन्य धार्मिक त्योहारों के लिए स्थायी प्रतिबंध का कोई नियम नहीं
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हालांकि कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर ऐसी मांगें पहले भी उठती रही हैं
बहस का बड़ा मुद्दा
यह मामला अब तीन प्रमुख सवालों को लेकर चर्चा में है:
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धार्मिक सहिष्णुता
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समानता का सिद्धांत
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सार्वजनिक नीति का संतुलन
फिलहाल यह देखना बाकी है कि दिल्ली सरकार इस मांग पर विचार करती है या इसे खारिज कर देती है।
रमजान के दौरान राजधानी में शराब की बिक्री को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस लगातार जारी है।






