उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने कौशांबी थाना क्षेत्र से पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन के दौरान महिला गैंग लीडर समेत कुल 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी दिल्ली-एनसीआर की कई संवेदनशील जगहों के फोटो, वीडियो और लाइव फुटेज पाकिस्तान स्थित हैंडलर को भेज रहे थे।
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह की गतिविधियां पिछले एक साल से अधिक समय से चल रही थीं और यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ हो सकता है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
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सुहेल मलिक (23) – निवासी बिजनौर
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सने इरम उर्फ महक (25) – निवासी कौशांबी (महिला)
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प्रवीन (19)
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राज वाल्मीकि (19) – निवासी औरैया
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शिवा वाल्मीकि – निवासी बदायूं
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रितिक गंगवार (23) – निवासी शाहजहांपुर
पुलिस ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपियों पर निम्नलिखित धाराओं में केस दर्ज किया है:
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भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 152 – देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य
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धारा 61(2) – आपराधिक षड्यंत्र
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आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा 3 और 5 – संवेदनशील जानकारी साझा करना और जासूसी गतिविधियां
इन धाराओं के तहत आरोपियों को कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।
रेलवे स्टेशन और सेना से जुड़े इलाकों के वीडियो पाकिस्तान भेजे
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई चौंकाने वाले सबूत मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने दिल्ली-एनसीआर की कई संवेदनशील जगहों के 50 से अधिक वीडियो और कई फोटो पाकिस्तान स्थित हैंडलर को भेजे थे।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन
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आनंद विहार रेलवे स्टेशन
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बीएसएफ मुख्यालय
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सीआरपीएफ मुख्यालय
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आर्मी कैंट एरिया
इन स्थानों के फोटो और वीडियो व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से भेजे जा रहे थे।
दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर लगाया गया था गुप्त कैमरा
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि मुख्य आरोपी सुहेल मलिक ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन के बाहर एक IP आधारित सोलर पावर्ड CCTV कैमरा लगाया था।
यह कैमरा बेहद चालाकी से छिपाकर लगाया गया था ताकि किसी का ध्यान न जाए। इस कैमरे की मदद से रेलवे स्टेशन की गतिविधियों की लाइव फीड सीधे पाकिस्तान भेजी जा रही थी।
पुलिस के अनुसार, इस तकनीक का इस्तेमाल करके आरोपी लगातार संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।
कई राज्यों में फैला हो सकता है नेटवर्क
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं था।
यह गिरोह निम्नलिखित राज्यों में भी सक्रिय हो सकता है:
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हरियाणा
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राजस्थान
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पंजाब
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कर्नाटक
जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही हैं।
पाकिस्तानी नंबरों पर होती थी बातचीत
पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी लगातार पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों के साथ संपर्क में थे। उनके मोबाइल फोन में कई चैट्स और कॉल रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे जासूसी गतिविधियों के संकेत मिलते हैं।
इसके अलावा आरोपियों को विदेश से पैकेट्स के जरिए सामान भी प्राप्त होता था, जिसकी जांच की जा रही है।
हनीट्रैप और पैसों का लालच बना कारण
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे जासूसी नेटवर्क में अक्सर विदेशी हैंडलर्स द्वारा हनीट्रैप या आर्थिक लालच का इस्तेमाल किया जाता है।
कई मामलों में युवा सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क में आते हैं और धीरे-धीरे उन्हें संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
कोर्ट में पेशी के बाद भेजे गए न्यायिक हिरासत में
गाजियाबाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया। कोर्ट ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
मामले की जांच अभी जारी है और सुरक्षा एजेंसियां इस नेटवर्क के पीछे मौजूद बड़े मॉड्यूल की भी जांच कर रही हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चेतावनी
यह घटना इस बात की चेतावनी है कि आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग किस तरह दुश्मन देशों द्वारा किया जा सकता है।
गाजियाबाद पुलिस की इस कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि इससे आतंकवाद विरोधी एजेंसियों को महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।







