गाजियाबाद। राइट टू एजुकेशन (आरटीई) एक्ट के तहत बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने की व्यवस्था में एक गंभीर अनियमितता सामने आई है। शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए आरटीई सीट आवंटन प्रक्रिया में बड़ी खामी उजागर हुई है, जहां एक बच्ची को ऐसे स्कूल में प्रवेश दिया गया जो वर्तमान में बंद है।
बंद स्कूल में मिला एडमिशन
इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन (आईपीए) के अनुसार, अभिभावक अनिल वर्मा की पुत्री नायरा वर्मा को विजय नगर के बागू स्थित सेंट जॉन्स स्कूल में आरटीई कोटा के तहत सीट आवंटित की गई।
हालांकि, यह स्कूल फिलहाल बंद और असंचालित है, जिसके चलते बच्ची का दाखिला संभव नहीं हो पा रहा।
शिक्षा के अधिकार पर सवाल
इस घटना ने न केवल बच्ची के शिक्षा के मौलिक अधिकार को प्रभावित किया है, बल्कि आरटीई प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आईपीए ने उठाई जांच की मांग
इस मामले को लेकर इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ओपी यादव को ज्ञापन सौंपा।
एसोसिएशन की प्रमुख मांगें:
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बच्ची को तुरंत किसी अन्य मान्यता प्राप्त स्कूल में दाखिला दिया जाए
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बंद स्कूल में सीट आवंटन की जांच हो
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दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए
सीमा त्यागी का बयान
आईपीए की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा त्यागी ने कहा:
“हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार है। प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसी भी बच्चे का भविष्य दांव पर नहीं लगना चाहिए। बंद स्कूल में सीट आवंटन आरटीई एक्ट की भावना के खिलाफ है।”
बीएसए का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएसए ने आश्वासन दिया है कि बच्ची का दाखिला जल्द ही किसी अन्य उपयुक्त स्कूल में कराया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान राहुल शर्मा, जितेंद्र अरोड़ा, रिंकू सिंह, अनिल वर्मा और विवेक त्यागी सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
पहले भी सामने आ चुकी हैं शिकायतें
गाजियाबाद में आरटीई से जुड़ी शिकायतें नई नहीं हैं।
पिछले वर्षों में कई बार यह आरोप लगे हैं कि:
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स्कूल आरटीई कोटा में दाखिला देने से बचते हैं
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अनावश्यक दस्तावेज मांगे जाते हैं
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प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि आरटीई पोर्टल पर स्कूलों की स्थिति (संचालित या बंद) की रीयल-टाइम अपडेट और सख्त सत्यापन जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
अभिभावकों में नाराजगी
अभिभावकों का कहना है कि आरटीई जैसी महत्वपूर्ण योजना में ऐसी गलतियां बच्चों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन हैं।
उन्होंने पूरे जिले में आरटीई आवंटन प्रक्रिया की व्यापक जांच की मांग की है।
निष्कर्ष
यह मामला एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से इस समस्या का समाधान करता है।








