Bpc News Digital

  • अपनी भाषा चुनें

You are Visiters no

816590
हमें फॉलो करें

भाषा चुनें

गाजियाबाद कलेक्ट्रेट में गैस संकट: मिट्टी के चूल्हे पर सेंक रही रोटियां, पुरानी यादें ताजा

BPC News National Desk
4 Min Read

गाजियाबाद के कलेक्ट्रेट परिसर में इन दिनों एक अनोखा दृश्य देखने को मिल रहा है। विकास भवन के सामने स्थित कैंटीन में गैस सिलिंडर की कमी के कारण अब मिट्टी के पारंपरिक चूल्हे पर रोटियां बनाई जा रही हैं। यह नजारा लोगों के लिए न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि पुरानी यादों को भी ताजा कर रहा है।

गैस खत्म, चूल्हा शुरू

कैंटीन में जब कमर्शियल एलपीजी गैस पूरी तरह खत्म हो गई और नया सिलिंडर समय पर उपलब्ध नहीं हो पाया, तो संचालक ने पारंपरिक तरीका अपनाने का फैसला किया।

मिट्टी का चूल्हा तैयार किया गया, लकड़ी और उपलों का इंतजाम किया गया और रसोई का काम फिर से शुरू कर दिया गया। अब यहां ताजी-ताजी रोटियां चूल्हे पर सेंकी जा रही हैं, जो लोगों को खासा आकर्षित कर रही हैं।

क्यों आई गैस की किल्लत?

सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण देशभर में कमर्शियल एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर गाजियाबाद समेत कई शहरों में देखने को मिल रहा है।

कलेक्ट्रेट की कैंटीन भी इसी सप्लाई संकट की चपेट में आ गई, जिससे अचानक वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी।

लोगों को आ रहा है देसी स्वाद

कलेक्ट्रेट परिसर में आने वाले पुलिसकर्मी, कर्मचारी और आम नागरिक इस बदलाव को दिलचस्प तरीके से ले रहे हैं।

कई लोगों का कहना है कि चूल्हे पर बनी रोटियों का स्वाद अलग ही होता है। लंबे समय बाद ऐसा खाना मिलने से लोगों को अपने पुराने दिन याद आ रहे हैं।

एक बुजुर्ग कर्मचारी ने बताया कि यह दृश्य उन्हें उनके बचपन की याद दिलाता है, जब हर घर में चूल्हे पर ही खाना बनता था।

कैंटीन कैसे चला रही काम?

फिलहाल कैंटीन में रोटियां चूल्हे पर बनाई जा रही हैं, जबकि दाल और सब्जी के लिए अन्य वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं।

कैंटीन संचालक का कहना है कि जब तक गैस की सप्लाई सामान्य नहीं हो जाती, वे इसी तरह काम चलाते रहेंगे।

इस बीच, चूल्हे के आसपास लोगों की भीड़ भी देखने को मिल रही है। लोग यहां खड़े होकर बातचीत कर रहे हैं, फोटो खींच रहे हैं और इस अनोखे अनुभव का आनंद ले रहे हैं।

देशभर में दिख रहा असर

यह समस्या केवल गाजियाबाद तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों में होटल, हॉस्टल और कैंटीन गैस की कमी से जूझ रहे हैं।

कई जगहों पर लोग पारंपरिक तरीकों की ओर लौट रहे हैं, जिससे एक बार फिर पुराने समय की झलक देखने को मिल रही है।

प्रशासन क्या कर रहा है?

जिला प्रशासन ने इस स्थिति का संज्ञान लिया है और गैस सप्लाई को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अस्थायी है और जल्द ही सामान्य हो जाएगी।

निष्कर्ष

गाजियाबाद कलेक्ट्रेट का यह दृश्य आधुनिकता और परंपरा के अनोखे संगम को दर्शाता है। एक तरफ गैस संकट है, तो दूसरी तरफ चूल्हे की रोटियों का स्वाद लोगों को जोड़ रहा है।

यह घटना यह भी दिखाती है कि संकट के समय पारंपरिक तरीके किस तरह उपयोगी साबित हो सकते हैं।

Share This Article
bpcnews.in is one of the fastest-growing Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India-based news and stories
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *