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हाउस टैक्स में 300% बढ़ोतरी के विरोध में व्यापारियों का अनिश्चितकालीन धरना, घंटाघर पर आंदोलन शुरू

BPC News National Desk
3 Min Read

गाजियाबाद में नगर निगम द्वारा आवासीय और व्यापारिक संपत्तियों पर हाउस टैक्स में लगभग 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के विरोध में व्यापारियों ने बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। व्यापारियों का आरोप है कि बढ़ोतरी निरस्त होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा बढ़ी हुई दरों पर बिल भेजे जा रहे हैं।

व्यापारियों ने लगाया शोषण का आरोप

व्यापारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सीधे तौर पर जनता और व्यापारियों का आर्थिक शोषण है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता की कमी के कारण आम नागरिकों को अनावश्यक बोझ झेलना पड़ रहा है।

आश्वासन के बावजूद नहीं हुआ क्रियान्वयन

व्यापारियों ने बताया कि नगर निगम की मेयर द्वारा कई बार मीडिया के माध्यम से हाउस टैक्स कम किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वर्तमान में भी उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दरों के अनुसार ही बिल मिल रहे हैं।

कई दौर की वार्ता रही बेनतीजा

इस मुद्दे को लेकर महानगर उद्योग व्यापार मंडल ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ता, ज्ञापन और अन्य प्रयास किए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद संगठन ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।

घंटाघर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू

व्यापार मंडल ने घोषणा की है कि 28 मार्च 2026 से प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक घंटाघर शहीद भगत सिंह चौक पर अनिश्चितकालीन और शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक हाउस टैक्स को कम कर संशोधित बिल जारी नहीं किए जाते।

कई व्यापारी नेता आंदोलन में शामिल

इस आंदोलन का नेतृत्व महानगर अध्यक्ष गोपीचंद प्रधान कर रहे हैं। इसके अलावा महामंत्री अशोक चावला, चेयरमैन बृजमोहन सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजदेव त्यागी और सुनील गोयल, युवा महानगर अध्यक्ष विपिन गोयल सहित कई अन्य व्यापारी नेता इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

जनसमर्थन की अपील

व्यापार मंडल ने सभी व्यापारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से इस आंदोलन में भाग लेने और समर्थन देने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल टैक्स का मुद्दा नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शिता की लड़ाई है।

प्रशासन के फैसले पर टिकी नजरें

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस बढ़ते दबाव के बीच क्या निर्णय लेता है और कब तक व्यापारियों की मांगों का समाधान करता है।

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