उत्तर प्रदेश पुलिस में 1998 बैच के 123 इंस्पेक्टरों को पदोन्नत कर डिप्टी एसपी (सीओ) बनाया गया है। विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की 24 मार्च को हुई बैठक के बाद 31 मार्च को इसके आदेश जारी किए गए।
इस फैसले से जहां विभाग में खुशी का माहौल है, वहीं कुछ मामलों ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
अलग-अलग शाखाओं के अधिकारी शामिल
प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों में 109 नागरिक पुलिस के इंस्पेक्टर शामिल हैं, जबकि 14 अधिकारी प्रतिसार निरीक्षक, कंपनी कमांडर और ट्रैफिक पुलिस से जुड़े हैं। लंबे समय से लंबित इस पदोन्नति का इंतजार किया जा रहा था।
रिटायरमेंट वाले दिन मिला प्रमोशन
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि चार इंस्पेक्टर—
- कृष्ण कुमार मिश्रा
- विनोद कुमार पायल
- देवी चरण
- सुशील कुमार
को उसी दिन प्रमोशन मिला, जिस दिन वे सेवानिवृत्त भी हो गए। यानी उन्हें डिप्टी एसपी का पद तो मिला, लेकिन इस पद पर काम करने का मौका नहीं मिल सका।
सिस्टम पर उठे सवाल
सूत्रों के मुताबिक, इन अधिकारियों को नई वर्दी तक तैयार कराने का समय भी नहीं मिल पाया। यह स्थिति जहां सम्मानजनक है, वहीं प्रशासनिक देरी की ओर भी संकेत करती है।
पुलिस महकमे के भीतर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते प्रमोशन प्रक्रिया पूरी कर ली जाती, तो इन अधिकारियों का अनुभव विभाग के लिए उपयोगी साबित हो सकता था।
विभाग का पक्ष
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया कई प्रशासनिक औपचारिकताओं और जांच से गुजरती है, जिसके कारण देरी हो जाती है।
भविष्य के लिए संकेत
यह फैसला एक ओर जहां 123 अधिकारियों के लिए गर्व का विषय है, वहीं यह भी स्पष्ट करता है कि प्रमोशन प्रक्रिया को और अधिक समयबद्ध और पारदर्शी बनाने की जरूरत है।








