गाज़ियाबाद के विकास भवन में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के अपमान का मामला सामने आने के बाद माहौल गरमा गया। घटना की जानकारी मिलते ही अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने मौके पर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया।
अधिवक्ताओं का हंगामा, कार्रवाई की मांग
जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन परिसर में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट तौर पर चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
उल्टी और धूल भरी मिली बाबा साहेब की तस्वीर
जानकारी के अनुसार, प्रोबेशन कार्यालय के एक कक्ष में बाबा साहेब की तस्वीर खिड़की के पास बाहर की ओर लगी हुई थी। तस्वीर पर धूल जमी हुई थी और सबसे आपत्तिजनक बात यह रही कि तस्वीर उल्टी अवस्था में पाई गई। इस स्थिति को देखकर अधिवक्ताओं का गुस्सा भड़क उठा।
अधिवक्ता का बयान
अधिवक्ता हरेंद्र गौतम ने कहा कि 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती से पहले इस तरह की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं और उनके सम्मान के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस में शिकायत दर्ज
इस मामले में संबंधित कर्मचारी जितेंद्र के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी गई है। अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, बाबा साहेब की तस्वीर को सम्मानपूर्वक हटाकर सही स्थान पर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी कार्यालयों में महापुरुषों के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी को उजागर करता है।
निष्कर्ष
बाबा साहेब का देश में अत्यंत सम्माननीय स्थान है और उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं जनभावनाओं को आहत करती हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।








