Bpc News Digital

  • अपनी भाषा चुनें

You are Visiters no

818156
हमें फॉलो करें

भाषा चुनें

लैंसडौन का नाम बदलने की मांग पर बढ़ा विवाद, व्यापारियों और स्थानीय लोगों में आक्रोश

BPC News National Desk
5 Min Read

उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लैंसडौन का नाम बदलकर “जसवंतगढ़” किए जाने की मांग को लेकर क्षेत्र में विवाद गहराता जा रहा है। कैंट बोर्ड की 10 अप्रैल को हुई बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों में नाराजगी बढ़ गई है। विरोध के स्वर अब सड़कों तक पहुंच चुके हैं और लैंसडौन बाजार में बंद तथा प्रदर्शन के माध्यम से लोगों ने अपनी असहमति जाहिर की है।

पर्यटन पहचान पर खतरा, बढ़ी स्थानीय चिंता

लैंसडौन उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में गिना जाता है। शांत वातावरण, प्राकृतिक सुंदरता और सैन्य इतिहास के कारण यह पर्यटन के लिहाज से देश-विदेश में खास पहचान रखता है। ऐसे में नाम परिवर्तन के प्रस्ताव ने स्थानीय लोगों को चिंता में डाल दिया है। व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से स्थापित पहचान को बदलना क्षेत्र के पर्यटन और कारोबार दोनों पर असर डाल सकता है।

बाजार बंद, सड़कों पर उतरे व्यापारी

प्रस्ताव के विरोध में कई व्यापारिक संगठनों ने एकजुट होकर बाजार बंद करवाया और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। व्यापारियों का कहना था कि लैंसडौन नाम केवल एक पहचान नहीं बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और पर्यटन विरासत का हिस्सा है। इसे बदलने का निर्णय स्थानीय लोगों की भावनाओं के विपरीत है।

रक्षा मंत्री को भेजा ज्ञापन

व्यापारियों और स्थानीय संगठनों ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ज्ञापन भेजकर लैंसडौन का नाम यथावत रखने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रशासन को नाम बदलने जैसे विवादित मुद्दों की बजाय क्षेत्र के विकास पर ध्यान देना चाहिए। लोगों का कहना है कि लैंसडौन में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार, सड़क सुधार, पार्किंग व्यवस्था, पेयजल और रोजगार जैसे कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं।

पर्यटन कारोबार पर पड़ सकता है असर

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लैंसडौन नाम विश्वभर में प्रसिद्ध है और हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यदि नाम बदला गया तो इससे पर्यटन ब्रांडिंग पर असर पड़ सकता है। होटल व्यवसायियों और दुकानदारों को आशंका है कि नई पहचान बनने में समय लगेगा, जिसका सीधा प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

समर्थन और विरोध के बीच बढ़ी बहस

कुछ लोगों का मानना है कि जसवंतगढ़ नाम भारतीय सेना और वीर सैनिकों की स्मृति से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस प्रस्ताव के पीछे देशभक्ति की भावना भी है। हालांकि विरोध करने वालों का कहना है कि वीर सैनिकों के सम्मान के लिए अन्य विकल्प अपनाए जा सकते हैं, लेकिन किसी ऐतिहासिक और लोकप्रिय स्थान का नाम बदलना उचित नहीं होगा।

जनसहमति की मांग, सोशल मीडिया पर अभियान

सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से जनता की राय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि इतना बड़ा निर्णय बिना व्यापक जनसहमति के नहीं लिया जाना चाहिए। कई स्थानीय नागरिकों ने सोशल मीडिया पर “सेव लैंसडौन” अभियान शुरू कर दिया है और अपनी नाराजगी जाहिर की है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों ने सरकार और प्रशासन पर बिना जनभावनाओं को समझे निर्णय लेने का आरोप लगाया है। वहीं कुछ संगठनों ने नाम परिवर्तन के समर्थन में भी आवाज उठाई है, जिससे क्षेत्र में बहस और तेज हो गई है।

विशेषज्ञों की राय: सोच-समझकर हो फैसला

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर या पर्यटन स्थल की पहचान उसके इतिहास और सांस्कृतिक महत्व से जुड़ी होती है। ऐसे में नाम परिवर्तन जैसे फैसलों पर संतुलित और व्यापक विचार-विमर्श जरूरी होता है। यदि स्थानीय जनता और व्यापारिक समुदाय इसके खिलाफ है तो प्रशासन को उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

“हमें विकास चाहिए, नाम नहीं बदलना”

लैंसडौन के लोगों का कहना है कि उन्हें विकास चाहिए, पहचान में बदलाव नहीं। उनका मानना है कि सरकार को पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने, युवाओं को रोजगार देने और बुनियादी समस्याओं को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।

क्या होगा अगला फैसला?

फिलहाल लैंसडौन का नाम बदलने का मुद्दा क्षेत्र में चर्चा और विवाद का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस मामले पर क्या निर्णय लेता है, इस पर स्थानीय लोगों और व्यापारियों की नजरें टिकी हुई हैं।

Share This Article
bpcnews.in is one of the fastest-growing Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India-based news and stories
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *