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पंचकर्म एवं वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला में प्राकृतिक उपचार पद्धतियों की दी गई विस्तृत जानकारी

BPC News National Desk
4 Min Read

हरिद्वार में आयोजित 7 दिवसीय पंचकर्म एवं वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला के पंचम दिवस पर प्रतिभागियों को आयुर्वेद, पंचकर्म और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़ी विभिन्न उपचार पद्धतियों की सैद्धांतिक एवं प्रयोगात्मक जानकारी दी गई। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य को प्राकृतिक रूप से बेहतर बनाने और रोगों से बचाव के पारंपरिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की।

आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों का हुआ प्रदर्शन

कार्यक्रम में श्री संजीवनी क्रिया योग ऋषिकुल के निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने प्रतिभागियों को बस्ति, अग्निकर्म, अभ्यंग और शिरोधारा जैसी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इन उपचार विधियों का प्रयोगात्मक प्रदर्शन भी किया, जिससे विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को इन प्रक्रियाओं को समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि पंचकर्म आयुर्वेद की एक प्राचीन और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है, जिसका उद्देश्य शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर उसे संतुलित और स्वस्थ बनाना है।

आधुनिक जीवनशैली में बढ़ा पंचकर्म का महत्व

उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में तनाव, गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के कारण लोग कई प्रकार की बीमारियों से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में पंचकर्म और वैकल्पिक चिकित्सा शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों पर विशेष सत्र

कार्यशाला में दिल्ली से आई प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ ऋतु त्यागी ने प्रतिभागियों को प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि व्यक्ति प्राकृतिक चिकित्सा के मूल सिद्धांतों और दिनचर्या का पालन करे तो कई जटिल रोगों से भी राहत पाई जा सकती है।

पंचमहाभूत पर आधारित है प्राकृतिक चिकित्सा

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा पंचमहाभूत—आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी—पर आधारित एक प्राचीन उपचार प्रणाली है। यह शरीर में इन तत्वों के संतुलन को बनाए रखकर स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।

स्टीम, मिट्टी और सूर्य चिकित्सा की जानकारी

ऋतु त्यागी ने स्टीम बाथ, मिट्टी चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा और जल चिकित्सा के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिट्टी, सूर्य और जल में प्राकृतिक ऊर्जा और विशेष गुण होते हैं, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होते हैं।

योग और वैकल्पिक चिकित्सा का महत्व

कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीनारायण जोशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि योग के साथ-साथ वैकल्पिक चिकित्सा का अभ्यास भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा पद्धति सीखने में सरल और किफायती है तथा समाज में स्वास्थ्य सुधार के लिए उपयोगी है।

विद्यार्थियों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी

कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से आए डॉ. अर्पित जोशी, योग प्रशिक्षक राजेंद्र नौटियाल, शोधार्थी दिशांत शर्मा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे। सभी ने विशेषज्ञों से विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े प्रश्न पूछे और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त की।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का मिला संदेश

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व को समझने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि प्राकृतिक उपचार पद्धतियां न केवल रोगों के उपचार में बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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