हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के दो शिक्षकों ने मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर पुस्तक लिखकर अकादमिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सहायक आचार्य डॉ. कौशल कुमार और डॉ. नितिन बिष्ट द्वारा लिखित पुस्तक “Mental Health and Well-being: Understanding Contemporary Issues Through a Multidimensional Approach” का हाल ही में प्रकाशन हुआ है।
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में बड़ा कदम
यह पुस्तक वर्तमान समय में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं—जैसे तनाव, अवसाद और चिंता—को समझने और उनसे निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार आज के प्रतिस्पर्धी और तनावपूर्ण जीवन में इस तरह की शोधपरक सामग्री की बेहद आवश्यकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप
लेखकों ने बताया कि यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप तैयार की गई है। इसमें मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों को सरल और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएं
- मानसिक स्वास्थ्य के बहुआयामी पहलुओं का विश्लेषण
- भावनात्मक संतुलन और जीवन की चुनौतियों पर फोकस
- मनोवैज्ञानिक विकारों के कारण और समाधान
- व्यावहारिक अनुभवों और समकालीन उदाहरणों का समावेश
यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए एक उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में उभर रही है।
विशेषज्ञों की राय और उद्देश्य
डॉ. कौशल कुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य अब केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
वहीं डॉ. नितिन बिष्ट ने बताया कि इस पुस्तक का उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाना और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देना है।
विश्वविद्यालय स्तर पर सराहना
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रकाश सिंह ने इस उपलब्धि पर दोनों लेखकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक संस्थान की अकादमिक गुणवत्ता और सामाजिक जिम्मेदारी को और मजबूत करती है।
समाज के लिए प्रेरणादायक पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन अभी भी खुलकर चर्चा की जरूरत है। ऐसे में इस तरह की पुस्तकें न केवल शोध को बढ़ावा देती हैं बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा भी प्रदान करती हैं।







