गाजियाबाद | उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक और कानूनी बहस को फिर से तेज कर दिया है। समाजवादी पार्टी से दो बार पार्षद रह चुके 70 वर्षीय हाजी खलील ने अपने से करीब 50 साल छोटी 20 वर्षीय युवती से चौथा निकाह कर लिया है। इस घटना के बाद उनकी दूसरी पत्नी नाजरीन ने गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है।
दूसरी पत्नी ने लगाए धोखाधड़ी के आरोप
नाजरीन ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि हाजी खलील ने करीब 30 साल पहले उनसे झूठ बोलकर निकाह किया था और अपनी पहली पत्नी तथा सात बच्चों की जानकारी छिपाई थी।
उनके मुताबिक, सच्चाई सामने आने के बाद भी उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन समय के साथ हालात बिगड़ते गए।
तीन बच्चों के बावजूद नहीं मिला अधिकार
नाजरीन का कहना है कि उनके तीन बच्चे—दो बेटियां और एक बेटा—हाजी खलील से हैं। इसके बावजूद उन्हें कभी वैवाहिक सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व नहीं मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक मानसिक और सामाजिक दबाव झेलने के बाद अब उन्हें घर से निकाल दिया गया है।
तीसरी शादी के बाद अब चौथा निकाह
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब हाजी खलील ने तीसरी शादी की, जो एक 40 वर्षीय महिला से थी। नाजरीन के अनुसार, तीसरी पत्नी को भी कुछ समय बाद छोड़ दिया गया, जिसके बाद वह दिल्ली में रहने लगी।
अब हाल ही में 20 वर्षीय युवती यास्मीन से चौथा निकाह किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है।
घर से निकाले जाने और धमकी के आरोप
दूसरी पत्नी ने आरोप लगाया कि चौथी शादी के बाद उन्हें और उनके बेटे को घर से बाहर कर दिया गया। इतना ही नहीं, विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
नाजरीन ने अपने बेटे के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर एडिशनल पुलिस कमिश्नर केशव कुमार चौधरी को शिकायत सौंपी है और सुरक्षा की मांग की है।
संपत्ति हड़पने की आशंका जताई
नाजरीन का दावा है कि हाजी खलील अपनी संपत्ति चौथी पत्नी के नाम करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी कम उम्र की युवती से शादी के पीछे आर्थिक स्वार्थ हो सकता है।
उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।
स्थानीय राजनीति से जुड़ा है मामला
हाजी खलील गाजियाबाद के कोतवाली थाना क्षेत्र के कैला भट्टा इलाके के निवासी हैं और स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे समाजवादी पार्टी से दो बार पार्षद रह चुके हैं।
इससे पहले भी उन पर जमीन पर अवैध कब्जे जैसे आरोप लग चुके हैं, हालांकि इन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, यह स्पष्ट नहीं है।
कानूनी और सामाजिक सवाल खड़े
यह मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के अधिकार, वैवाहिक पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
भारतीय कानून में बहुविवाह को लेकर अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग प्रावधान हैं, लेकिन धोखाधड़ी, धमकी और उत्पीड़न किसी भी स्थिति में अपराध की श्रेणी में आते हैं।
पुलिस ने जांच का दिया आश्वासन
एडिशनल पुलिस कमिश्नर केशव कुमार चौधरी ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
इस पूरे घटनाक्रम ने समाज में महिलाओं की सुरक्षा और वैवाहिक अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच के बाद क्या सच्चाई सामने आती है और पीड़ित पक्ष को कितना न्याय मिल पाता है।







