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ईंधन बचत पर योगी सरकार का बड़ा कदम, मंत्रियों के काफिलों में 50% वाहन घटाने के निर्देश

BPC News National Desk
6 Min Read

देश में ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत को लेकर चल रही मुहिम अब और तेज होती दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील के बाद अब Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी इस दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों के काफिलों में शामिल 50 प्रतिशत वाहनों को तत्काल प्रभाव से कम करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि सरकारी संसाधनों के उपयोग में भी संतुलन आएगा।

अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने के निर्देश

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग इस दिशा में गंभीरता से काम करें और अनावश्यक वाहन उपयोग को सीमित किया जाए। हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ऊर्जा संकट को देखते हुए सरकार अब बचत और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दे रही है।

निजी कंपनियों को भी “वर्क फ्रॉम होम” की सलाह

सरकार की ओर से केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र को भी इस अभियान से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा है कि बड़ी कंपनियों और निजी संस्थानों को सप्ताह में कम से कम दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” लागू करने की सलाह जारी की जाए। माना जा रहा है कि इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी और पेट्रोल-डीजल की खपत में भी कमी आएगी।

कोरोना काल के मॉडल को फिर अपनाने पर विचार

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान वर्क फ्रॉम होम मॉडल काफी प्रभावी साबित हुआ था। इससे न केवल यात्रा में लगने वाला समय बचा, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण में भी कमी देखने को मिली थी। अब सरकार उसी मॉडल को आंशिक रूप से फिर से लागू करने की दिशा में विचार कर रही है।

आम लोगों से भी की गई ईंधन बचाने की अपील

मुख्यमंत्री ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे गैर-जरूरी ईंधन खर्च को कम करें। छोटी दूरी के लिए पैदल चलने, सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने और निजी वाहनों का सीमित इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि यदि लोग अपनी दैनिक आदतों में थोड़ा बदलाव करें तो बड़े स्तर पर ऊर्जा बचत संभव है।

सोने की खरीदारी सीमित रखने की सलाह

योगी आदित्यनाथ ने लोगों से सोने की खरीदारी सीमित रखने की भी अपील की है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक परिस्थितियों के बीच सरकार चाहती है कि लोग अनावश्यक खर्चों से बचें और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें। हालांकि इस अपील को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

प्रशासनिक स्तर पर भी लागू होगी नीति

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में मुख्यमंत्री के इन निर्देशों को एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि ऊर्जा संरक्षण केवल जनता के लिए सलाह नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी लागू की जा रही नीति है। इससे सरकारी विभागों में भी संसाधनों के उपयोग को लेकर जवाबदेही बढ़ सकती है।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने किया स्वागत

पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि बड़े स्तर पर सरकारी और निजी क्षेत्र ईंधन बचत की दिशा में कदम उठाएं तो इससे प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। वाहनों की संख्या घटने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और ट्रैफिक दबाव में भी राहत मिल सकती है।

केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं, दीर्घकालिक योजना की जरूरत

हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल अपील और प्रतीकात्मक कदमों से समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं होगा। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन को और मजबूत करना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर निवेश बढ़ाना भी जरूरी होगा।

अन्य राज्यों में भी शुरू हुई चर्चा

उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद अन्य राज्यों में भी इस तरह की पहल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में ऊर्जा बचत और संसाधनों के सीमित उपयोग को लेकर और भी नीतिगत फैसले सामने आ सकते हैं।

ऊर्जा संरक्षण को बताया राष्ट्रीय जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ऊर्जा संरक्षण आज केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन चुका है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर देशहित में योगदान दें। सरकार का मानना है कि जनभागीदारी के बिना किसी भी ऊर्जा बचत अभियान को पूरी तरह सफल नहीं बनाया जा सकता।

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