Ravindra Kumar ने Ghaziabad में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत होने वाले दाखिलों में सामने आ रही अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए निजी स्कूलों पर सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने अभिभावकों को परेशान किए जाने और स्कूलों की मनमानी की शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
48 प्रतिशत बच्चों को अब तक नहीं मिला दाखिला
जानकारी के अनुसार जिले में आरटीई के तहत चयनित लगभग 48 प्रतिशत बच्चों को अब तक स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल पाया है। आरोप है कि कई निजी स्कूल नियमों के विपरीत अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग कर रहे हैं और जानबूझकर प्रवेश प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं।
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया है।
“आरटीई के तहत दाखिला देना स्कूलों की जिम्मेदारी”
डीएम रविंद्र कुमार ने स्पष्ट कहा कि Right to Education Act के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश देना स्कूलों की कानूनी जिम्मेदारी है। यदि कोई स्कूल नियमों की अनदेखी करता है या अभिभावकों को अनावश्यक रूप से परेशान करता है तो उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को ऐसे स्कूलों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं जो दाखिला प्रक्रिया में लापरवाही बरत रहे हैं।
अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की शिकायतें
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है और किसी भी स्थिति में इस व्यवस्था को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कई अभिभावकों ने शिकायत की है कि स्कूल प्रबंधन उनसे ऐसे दस्तावेज मांग रहे हैं, जिनका आरटीई प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूलों की जांच के निर्देश
प्रशासन की ओर से शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों में जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करें और जिन बच्चों का चयन हो चुका है, उन्हें जल्द से जल्द प्रवेश दिलाया जाए।
साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी अभिभावक से अतिरिक्त शुल्क या अनावश्यक दस्तावेज की मांग न की जाए।
नोटिस के बावजूद जारी हैं शिकायतें
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आरटीई के तहत चयनित बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करना अनिवार्य है और इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि कई स्कूलों को पहले भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। अब ऐसे स्कूलों के खिलाफ कठोर कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।
अभिभावकों ने किया डीएम के फैसले का स्वागत
अभिभावकों ने जिलाधिकारी के इस सख्त रवैये का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से वे स्कूलों के चक्कर काटने को मजबूर थे और बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ था।
कई अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन जानबूझकर दाखिले में देरी कर रहा था ताकि अभिभावक परेशान होकर प्रक्रिया छोड़ दें।
“कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा”
डीएम रविंद्र कुमार ने साफ कहा कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि जिले का कोई भी पात्र बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आरटीई दाखिलों की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए।
निजी स्कूलों में बढ़ी हलचल
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले के निजी स्कूलों में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दाखिला प्रक्रिया में तेजी आएगी और पात्र बच्चों को जल्द राहत मिलेगी।








