Dehradun में जल जीवन मिशन के अंतर्गत कार्य कर रहे ठेकेदारों ने लंबित भुगतान को लेकर सरकार और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों और ठेकेदारों ने सचिवालय में सचिव पेयजल रणवीर सिंह चौहान से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। इसके बाद Uttaranchal Press Club में प्रेस वार्ता आयोजित कर सरकार से जल्द भुगतान जारी करने की मांग की गई।
ढाई साल से लंबित हैं भुगतान
प्रेस वार्ता के दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा कि पिछले करीब ढाई वर्षों से ठेकेदारों के वैध भुगतान लंबित पड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी लगातार अलग-अलग कारण बताकर भुगतान को टालते रहे हैं। कभी जीओ टैगिंग, कभी केएमएल फाइल और कभी यूनिक आईडी मैपिंग का हवाला देकर भुगतान में देरी की गई।
उन्होंने कहा कि Jal Jeevan Mission प्रधानमंत्री Narendra Modi की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड के ठेकेदारों ने अपनी क्षमता से अधिक मेहनत और संसाधन लगाए। इसके बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
एमओयू के बाद भी नहीं मिला भुगतान
अमित अग्रवाल ने बताया कि 6 अप्रैल 2026 को सचिव स्तर पर हुई बैठक में कहा गया था कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच एमओयू होने के बाद भुगतान जारी कर दिया जाएगा। अब जबकि एमओयू की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तब भी भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आ रही है।
उन्होंने कहा कि अब अधिकारियों द्वारा यह कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार से धनराशि प्राप्त नहीं हुई है।
15 दिन में भुगतान नहीं तो आंदोलन
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सचिन मित्तल ने कहा कि ठेकेदारों को शासन से उम्मीद है कि जल्द धनराशि जारी कर राहत दी जाएगी। लेकिन यदि आगामी 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं हुआ तो जल जीवन मिशन की कई योजनाएं पूरी तरह ठप होने की स्थिति में पहुंच जाएंगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में ठेकेदार जिलों और मुख्यालय स्तर पर धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
निर्माण कार्य प्रभावित, मजदूरों के भुगतान पर संकट
ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान न मिलने के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कई ठेकेदार आर्थिक दबाव में हैं और मजदूरों तथा सप्लायरों का भुगतान भी नहीं कर पा रहे हैं। इससे परियोजनाओं की गति धीमी हो गई है और भविष्य में पेयजल योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
प्रेस वार्ता में मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि जल जीवन मिशन जैसी बड़ी योजना का सीधा संबंध ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा पहुंचाने से है। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो इसका असर आम जनता तक भी पहुंचेगा।
पहाड़ी क्षेत्रों में काम करना बना चुनौती
उन्होंने कहा कि ठेकेदारों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में लगातार काम किया है। पहाड़ी क्षेत्रों में संसाधनों की कमी और मौसम की चुनौतियों के बावजूद परियोजनाओं को पूरा करने का प्रयास किया गया, लेकिन अब भुगतान में देरी से ठेकेदारों का मनोबल टूट रहा है।
एसोसिएशन ने सरकार से मांग की कि लंबित भुगतान तत्काल जारी किया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।
प्रेस वार्ता में एसोसिएशन के सचिव सुनील गुप्ता, संदीप मित्तल और गौरव गोयल सहित कई ठेकेदार मौजूद रहे।
सरकार के फैसले पर टिकी नजर
फिलहाल ठेकेदारों की चेतावनी के बाद सरकार और विभागीय अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आगामी दिनों में शासन स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है और ठेकेदारों को राहत मिलती है या नहीं।







