भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी Research and Analysis Wing (रॉ) के पूर्व प्रमुख ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि आधुनिक दौर में सुरक्षा खतरे पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल और तकनीकी हो चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ड्रोन, स्नाइपर गन और हाईटेक निगरानी प्रणालियों का दुरुपयोग अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा नहीं, बल्कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्थाओं की समय-समय पर समीक्षा और तकनीकी उन्नयन बेहद जरूरी हो गया है।
ड्रोन हमले नई चुनौती
पूर्व खुफिया प्रमुख ने कहा कि दुनिया के कई देशों में:
- सैन्य ठिकानों,
- संवेदनशील संस्थानों,
- और शीर्ष नेताओं
पर ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि छोटे आकार के ड्रोन:
- आसानी से छिपाए जा सकते हैं,
- लंबी दूरी से नियंत्रित किए जा सकते हैं,
- और कई बार पारंपरिक सुरक्षा तंत्र से बच निकलते हैं।
यही कारण है कि अब वीवीआईपी सुरक्षा में:
- एंटी-ड्रोन सिस्टम,
- रडार निगरानी,
- और रियल टाइम ट्रैकिंग तकनीक
की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
स्नाइपर और हाईटेक हथियारों का बढ़ता खतरा
पूर्व रॉ प्रमुख ने कहा कि आज सुरक्षा एजेंसियों को केवल पारंपरिक आतंकी खतरों से नहीं, बल्कि लंबी दूरी से सटीक निशाना लगाने वाले स्नाइपर हथियारों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से भी सावधान रहना होगा।
उन्होंने कहा कि:
- आधुनिक हथियारों की पहुंच बढ़ रही है,
- तकनीक तेजी से बदल रही है,
- और सुरक्षा एजेंसियों को भी उसी गति से अपनी रणनीति अपडेट करनी होगी।
आधुनिक सुरक्षा केवल मानव घेरे तक सीमित नहीं
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में सुरक्षा केवल सुरक्षाकर्मियों के घेरे तक सीमित नहीं रह गई है। अब सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हैं:
- साइबर निगरानी,
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग,
- फेस रिकग्निशन सिस्टम,
- ड्रोन डिटेक्शन तकनीक,
- और इंटेलिजेंस डेटा शेयरिंग।
उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित सुरक्षा भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बनने जा रही है।
सीमाओं पर भी बढ़ा ड्रोन का खतरा
राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में:
- ड्रोन के जरिए हथियार,
- नकदी,
- और नशीले पदार्थों
की तस्करी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवादी और आपराधिक संगठन अब तकनीक का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
सुरक्षा ढांचे को लगातार अपग्रेड करने की जरूरत
पूर्व रॉ प्रमुख ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को केवल वर्तमान खतरों पर नहीं, बल्कि भविष्य की संभावित चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि:
- सुरक्षा सिस्टम का नियमित ऑडिट हो,
- नई तकनीकों में निवेश बढ़ाया जाए,
- और सुरक्षा बलों को हाईटेक प्रशिक्षण दिया जाए।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सराहना
उन्होंने भारतीय सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा एजेंसियां लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि:
“बदलते समय के साथ सतर्कता और तकनीकी दक्षता दोनों को और मजबूत करना आवश्यक है।”
वैश्विक हालात के बीच बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के कई देशों में हाई-प्रोफाइल नेताओं की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। आधुनिक तकनीक जहां सुविधाएं बढ़ा रही है, वहीं सुरक्षा एजेंसियों के लिए नए खतरे भी पैदा कर रही है।
पूर्व रॉ प्रमुख ने अंत में कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व की सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक प्राथमिकता होनी चाहिए।









